स्वाधीनता के 79 वर्ष: जय हो… गरीबी से गर्व की ओर बढ़ता भारत…

15 अगस्त 1947 देश पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हो चुका था।

सामने थी बदहाल अर्थव्यवस्था, गरीबी और भुखमरी की चुनौतियां। भारत 18 फीसदी साक्षरता और 32 वर्ष की औसत जीवन प्रत्याशा से जूझ रहा था। आजादी के 79 वर्षों के सफर में भारत ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखा है।

देश में साक्षरता दर 77 प्रतिशत और औसत आयु 70 वर्ष से अधिक हो गई है। कभी अनाज की जरूरतों को पूरी करने के लिए अमेरिका की अपमानजनक शर्तों को मानने के लिए मजबूर देश आज दुनिया के 150 से अधिक देशों को अनाज और कृषि उत्पादों का निर्यात करता है। परमाणु शक्ति संपन्न भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। पेश है उपलब्धियों और चुनौतियों पर महेन्द्र सिंह का विश्लेषण।

विदेशी मुद्रा भंडार (अरब डॉलर)

1947 1.2

वृद्धि +54,066%

2026 707

चुनौतीः डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव है। सोने का आयात कम करके और वस्तुओं व सेवाओं का निर्यात बढ़ा कर देश विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूत कर सकता है।

प्रति व्यक्ति आय (रुपये वार्षिक)
1947  250
2026  2,19,575

चुनौतीः आजादी के बाद से एक औसत भारतीय की आय कई गुना बढ़ी है लेकिन करीब 140 करोड़ की आबादी वाले देश के तौर पर हमारी प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। सभी भारतीयों के लिए गुणवत्तापूर्ण जीवन स्तर सुनिश्चित करने के लिए प्रति व्यक्ति आय में तेज वृद्धि जरूरी है।

खाद्यान्न उत्पादन (मिलियन टन)

1947   50
2026   330

चुनौती: खाद्यान्न उत्पादन के मोर्चे पर देश की उपलब्धियां शानदार हैं लेकिन इसी के अनुपात में किसानों की आय नहीं बढ़ी है। तकनीक और खेती के आधुनिक तौर-तरीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।

केंद्रीय बजट

1947-49 197 करोड़ रुपये

2026-27 53.47 लाख करोड़

चुनौती: समय के साथ केंद्रीय बजट का आकार बढ़ा है। जन कल्याण पर सार्वजनिक खर्च भी बढ़ा है लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है। इसके बिना हम गुणक्ता पूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मुहैया करा सकते हैं।

रक्षा पर खर्च


1947 9274 करोड़ रुपये
2026 87.85 लाख करोड़

चुनौतीः रक्षा बजट लगातार बढ़ रहा है लेकिन अगर इसमें महंगाई जोड़ ली जाए तो यह वृद्धि कुछ खास नहीं है। देश चीन व पाकिस्तान से जिस तरह की सामरिक चुनौतियां का सामना कर रहा है, उसके लिहाज से रक्षा खर्च काफी नहीं है। सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा पर ज्यादा संसाधन खर्च किया जाना जरूरी है।

निर्यात

1947 400 करोड़ रुपये
2026 882 लाख करोड़

चुनौतीः हमारा निर्यात बढ़ रहा है लेकिन वस्तुओं के वैश्विक निर्यात बाजार में हमारी हिस्सेदारी मात्र 1.8 प्रतिशत है। हमें ऐसे गुणवत्ता पूर्ण उत्त्पाद बनाने होंगे जो वैश्विक बाजार में पहचान बना सकें। इसके लिए मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाना होगा।

भारत की जीडीपी का सफर

तेज हुई अर्थव्यवस्था की रफ्तार : 1991 में भारत द्वारा अपनाए गए आर्थिक उदारीकरण के नीतिगत सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदल दिया। 1947 से 1990 के बीच जहां भारत की औसत विकास दर लगभग 3.5% के आसपास सिमटी हुई थी, वहीं सुधारों के बाद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया।

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