सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर के हाई कोर्टों से आग्रह किया कि वे अपने साथ-साथ जिला व तालुका स्तर पर शिकायत निवारण समितियां बनाएं ताकि बार व न्यायपालिका के सदस्यों के बीच मुद्दों को सुलझाया जा सके और समयबद्ध तरीके व आपसी सहमति से उनका समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के सदस्यों को शामिल करने वाली ऐसी संस्थागत प्रणाली वकीलों और जजों के बीच अच्छे रिश्ते बनाने में मदद करेगी और बेवजह के झगड़ों को बढ़ने से रोकेगी।
पीठ ने कहा कि प्रस्तावित प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि बार और बेंच के बीच मुद्दों को जल्द से जल्द मिलकर और असरदार तरीके से सुलझाया जाए। शीर्ष अदालत ने यह बात आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में हाल में हुई घटना के संबंध में खुद से पंजीकृत की गईं दो रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कही।
इस घटना में कोर्ट की कार्यवाही के दौरान जस्टिस तरलाडा राजशेखर राव ने एक युवा वकील को 24 घंटे की न्यायिक हिरासतम में भेजने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आगे किसी निर्देश की जरूरत नहीं है क्योंकि यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के दखल से सुलझा लिया गया है।