1953 के तख्तापलट से लेकर ईरान में सुप्रीम लीडर की मृत्यु तक, ईरान‑अमेरिका संबंधों में किन प्रमुख घटनाओं ने तनाव उत्पन्न किया, यह जानना महत्वपूर्ण है…

अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान के कई सैन्य और सरकारी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए।

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा कि तेहरान में खामेनेई का आवास एक जबरदस्त और अचानक हुए हमले में तबाह हो गया और ऐसे कई संकेत हैं कि वे अब जीवित नहीं हैं। 

बाद में अमेरिकी प्रशासन और इसराइली अधिकारियों ने भी इन दावों की पुष्टि की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह हमला ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाकर किया गया और इसे उन्होंने ईरानी जनता के लिए अपने भविष्य को वापस लेने का अवसर बताया। व्हाइट हाउस ने भी खामेनेई की मौत की पुष्टि की है।

सैटेलाइट तस्वीरों से तबाही की पुष्टि

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करते हुए पुष्टि की है कि तेहरान में लीडरशिप हाउस कंपाउंड के कई हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

एयरबस द्वारा जारी उच्च‑रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी में कई इमारतें ढही हुई, पेड़ उखड़े हुए और कुछ हिस्सों से धुआं उठता हुआ दिखाई देता है। इन्हीं इमारतों में खामेनेई का कार्यालय और आवास भी शामिल था।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

हमलों के तुरंत बाद ईरान ने इसराइल और उन खाड़ी अरब देशों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

इनमें बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। क्षेत्र में कई जगह हवाई हमलों के सायरन बजाए गए और कुछ ठिकानों पर क्षति की भी खबरें आई हैं।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि यह हमला युद्ध की घोषणा के समान है और इसका कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह टकराव मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष का रूप ले सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ईरान‑अमेरिका संबंधों का तनाव

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का इतिहास लंबा और जटिल रहा है। 1953 में ईरान के निर्वाचित प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देक को अमेरिका और ब्रिटेन समर्थित तख़्तापलट में सत्ता से हटा दिया गया था। इसके बाद शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी का शासन आया, जिसे अमेरिका का समर्थन प्राप्त था।

1979 की इस्लामिक क्रांति में शाह को देश छोड़कर भागना पड़ा और निर्वासन से लौटे आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना हुई।

इसी दौर में तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ और 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाया गया, जिससे दोनों देशों के संबंध गहरे संकट में चले गए।

हाल के वर्षों की आंतरिक उथल‑पुथल

ईरान हाल के वर्षों में आंतरिक विरोध प्रदर्शनों से भी जूझता रहा है। 2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

इसके बाद 2025 के अंत में तेहरान में आर्थिक मुद्दों को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन धीरे‑धीरे इस्लामिक रिपब्लिक को समाप्त करने की मांगों में बदल गए। इन प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें आई थीं।

खामेनेई की मौत ईरान की सत्ता संरचना में एक बड़े शून्य को जन्म देती है। वे 1989 से देश के सर्वोच्च नेता थे और सैन्य, न्यायिक तथा धार्मिक संस्थानों पर उनका अंतिम नियंत्रण था।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराधिकार की प्रक्रिया जटिल और अपारदर्शी है, और निकट भविष्य में ईरान में सत्ता संघर्ष तेज हो सकता है।

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