‘धार्मिक प्रथाओं का पैमाना तय करना न्यायपालिका के लिए कठिन’, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी…

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि न्यायिक मंचों के लिए किसी धार्मिक संप्रदाय की किसी प्रथा को आवश्यक या गैर-आवश्यक घोषित करने का मापदंड तय करना बहुत कठिन, बल्कि असंभव है।

यदि कोई विशेष हिंदू संप्रदाय कुछ प्रथाओं का पालन करता है, तो उनमें से सभी को आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं कहा जा सकता है यदि वे नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

संविधान के तहत किसी धर्म की धार्मिक प्रथा को तभी तक संरक्षण प्राप्त है, जब तक कि वह नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य के विरुद्ध न हो।

सबरीमाला मंदिर समेत धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों द्वारा पालन की जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और सीमा से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के सातवें दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की संविधान पीठ ने कहा कि संविधान में ‘आवश्यक’ शब्द का कोई उल्लेख नहीं है।

एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि किसी धर्म को उसके संप्रदाय के सिद्धांतों से परिभाषित नहीं किया जा सकता।

धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में निश्चित रूप से वे बातें शामिल होंगी, जो अनुयायी स्वयं तय करते हैं। वे कैसे और कब पूजा करते हैं, यह सब अनुयायियों का निर्णय है। इसलिए कृपया कोई नया विचार न लाएं या पुराने को नए से प्रतिस्थापित न करें।

द्विवेदी ने सबरीमाला मामले में 2018 के बहुमत के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कृपया इसे संबंधित संप्रदाय पर छोड़ दें कि वे कैसे पूजा करना चाहते हैं।

अदालतों को न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करते समय बहुत सावधानी बरतनी होगी। 2018 में शीर्ष अदालत के फैसले में सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

संविधान पीठ में शामिल जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि अनुच्छेद 25 (2) (ख) किसी राज्य को सामाजिक कल्याण और सुधार के लिए कानून बनाने या सार्वजनिक हिंदू धार्मिक संस्थानों को हिंदुओं के सभी वर्गों और समुदायों के लिए खोलने का अधिकार देता है।

इसे पिछली सदी के छठे दशक में इसलिए जोड़ा गया था, क्योंकि उस समय बहिष्कार की सामाजिक बुराई व्यापक रूप से व्याप्त थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *