दक्षिण लेबनान में इजरायली सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर लिया है। इसे पिछले 26 वर्षों में लेबनान के भीतर इजरायल की सबसे गहरी सैन्य घुसपैठ माना जा रहा है। मार्च में हिजबुल्ला के साथ शुरू हुए ताजा संघर्ष के बाद यह इजरायल की बड़ी क्षेत्रीय बढ़त भी है।
क्रूसेडर काल का यह ऐतिहासिक किला दक्षिण लेबनान के शहर नबातियेह के पास एक पहाड़ी पर स्थित है। इजरायली सेना ने कई दिनों तक चली भीषण लड़ाई और आसपास के गांवों में हवाई हमलों के बाद इस इलाके पर नियंत्रण हासिल किया। इन क्षेत्रों में इजरायली सैनिकों और हिजबुल्ला लड़ाकों के बीच लगातार संघर्ष हुआ।
इजरायली सेना ने कहा कि ब्यूफोर्ट रिज और सुलुकी घाटी क्षेत्र में कुछ दिन पहले अभियान शुरू किया गया था। सेना के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य हिजबुल्ला के बुनियादी ढांचे को नष्ट करना और इजरायली नागरिकों के लिए बताए गए प्रत्यक्ष खतरों को खत्म करना था।
सीजफायर के बावजूद बढ़ी सैन्य कार्रवाई
इजरायली सेना ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अभियान का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। सेना की ओर से जारी तस्वीरों में सैनिक ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले के बाहर दिखाई दिए। इजरायल इससे पहले 1982 से 2000 तक दक्षिण लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी के दौरान भी इस किले पर नियंत्रण रख चुका है।
यह सैन्य बढ़त ऐसे समय में हुई है, जब 17 अप्रैल से दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम लागू है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सैनिक लितानी नदी पार कर चुके हैं और अब नबातियेह शहर से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गए हैं। नबातियेह दक्षिण लेबनान के सबसे बड़े शहरों में से एक माना जाता है।
हालिया घटनाक्रम पर हिजबुल्ला या लेबनान सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, इजरायल और लेबनान के बीच वॉशिंगटन में प्रत्यक्ष वार्ता भी जारी है, लेकिन सीमा पर तनाव अभी भी बना हुआ है।
मार्च से जारी है संघर्ष
इजरायल और हिजबुल्ला के बीच मौजूदा युद्ध 2 मार्च को शुरू हुआ था। बताया जाता है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के दो दिन बाद हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दागे थे। इसके बाद इजरायल ने लेबनान में अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया।
संघर्ष शुरू होने के बाद से इजरायली सेना ने सीमा के पास स्थित कई गांवों और कस्बों पर कब्जा कर लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस युद्ध में लेबनान में 3,350 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।