इजरायल‑ईरान संघर्ष: मिडिल ईस्ट को पानी की हर बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है – ईरान ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला कर दी हलचल…

फारस की खाड़ी में जारी सैन्य तनाव के बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध तेज हुआ तो तेल से भी अधिक गंभीर संकट पानी का हो सकता है।

खाड़ी क्षेत्र के कई देश पेयजल के लिए समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले डीसैलीनेशन संयंत्रों पर अत्यधिक निर्भर हैं और ये संयंत्र तटीय इलाकों में स्थित होने के कारण मिसाइल या ड्रोन हमलों की जद में हैं।

विश्लेषकों के अनुसार खाड़ी तट पर सैकड़ों डीसैलीनेशन संयंत्र हैं, जो लाखों लोगों को पानी उपलब्ध कराते हैं। इनके बिना दुबई, कुवैत सिटी, दोहा और मनामा जैसे बड़े शहर अपनी वर्तमान आबादी को बनाए नहीं रख सकते।

डीसैलीनेशन संयंत्र पर हमला

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद संघर्ष कई बार खाड़ी के महत्वपूर्ण जल और ऊर्जा ढांचे के करीब पहुंच चुका है। दो मार्च को दुबई के जेबेल अली बंदरगाह के पास हुए ईरानी मिसाइलें व ड्रोन दुनिया के सबसे बड़े डीसैलीनेशन संयंत्रों में से एक से लगभग 12 मील दूर गिरे।

संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह एफ-1 जल व बिजली परिसर और कुवैत के दोहा वेस्ट डीसैलीनेशन संयंत्र के आसपास भी नुकसान की खबरें आईं।

बहरीन ने भी अपने एक जल संयंत्र को ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया है, जबकि ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमले में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास केश्म द्वीप स्थित एक डीसैलीनेशन संयंत्र क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे 30 गांवों की जल आपूर्ति प्रभावित हुई।

तेल के साथ पानी के लिए संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि इन संयंत्रों का बड़ा हिस्सा बिजलीघरों के साथ जुड़ा होता है। ऐसे में बिजली अवसंरचना पर हमले भी पानी उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। यदि किसी बड़े संयंत्र को गंभीर नुकसान हुआ तो कई शहर कुछ ही दिनों में पेयजल संकट में आ सकते हैं।

डीसैलीनेशन संयंत्रों पर साइबर हमलों का भी खतरा बढ़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान समर्थित समूहों पर आरोप लगाया है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों से जुड़े संयंत्रों पर गंभीर साइबर हमले करके इन्हें ठप करने की कोशिश की गई।

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