इजरायल ने भारत से आग्रह किया है कि वह ईरान की शक्तिशाली सैन्य एजेंसी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगाए।
इजरायल के विदेश मंत्रालय ने पिछले कुछ महीनों के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के समक्ष यह मुद्दा औपचारिक रूप से उठाया है।
इजरायली पक्ष का तर्क है कि आईआरजीसी जैसी एजेंसी लंबे समय में भारत जैसे लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों के विरुद्ध काम कर सकती है, इसलिए भारत सरकार को तुरंत सतर्कता बरतते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
यह जानकारी इजरायल के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारतीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां बातचीत में दी।
भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से इस आग्रह पर मौजूदा हालात में कोई कदम उठाने के संकेत नहीं हैं। भारत आईआरजीसी को अपनी सुरक्षा के लिए फिलहाल कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं मानता है, साथ ही ईरान के साथ भारत के बेहद पुराने सांस्कृतिक संबंध भी हैं।
भारत और इजरायल के गहरे संबंध
इजरायल के साथ भारत के आतंकवाद को रोकने को लेकर काफी गहरे संबंध रहे हैं और दोनों देशों के बीच इस बारे में नियमित सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इजरायल ने पहले हमास पर भी प्रतिबंध लगाने का कई बार भारत से आग्रह किया है, लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया है।
यहूदी समुदाय पर आतंकवादी हमलों में IRGC ने की मदद- इजरायल
इजरायली अधिकारियों ने ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए कहा है कि शुरू में ऑस्ट्रेलिया ने आईआरजीसी को लेकर ईरान के आग्रहों या चेतावनियों को पर्याप्त गंभीरता नहीं दी थी, लेकिन बाद में यह साबित हो गया कि ईरानी सैन्य एजेंसी ने ऑस्ट्रेलिया के अंदर यहूदी समुदाय पर आतंकवादी वारदातों में मदद की।
वर्ष 2024 में सिडनी और मेलबर्न में हुए हमलों के बाद ऑस्ट्रेलिया ने नवंबर 2025 में आईआरजीसी को राज्य प्रायोजित आतंकवाद का प्रायोजक घोषित कर दिया था। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने भी इन घटनाओं से जुड़े आईआरजीसी कमांडरों के नाम सार्वजनिक किए थे।
भारत-ईरान के बीच संबंध बेहद पुराने
भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह बहुत ही पेंचीदा मामला है जिसको लेकर भारत अपने हितों के साथ ही वैश्विक स्तर पर दो धुर विरोधी देशों के साथ अपने संबंधों में सामंजस्य बनाने के संदर्भ से भी देखना है। ईरान के बीच संबंध बेहद पुराने और सभ्यतागत हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ईरान के साथ गहरे संपर्क में है।
हाल ही में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नई दिल्ली का दौरा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान के सहयोग पर निर्भर रहा है।
होर्मुज बंद होने से भारत को बड़ा नुकसान
मौजूदा पश्चिम एशिया विवाद की वजह से होर्मुज की खाड़ी के बंद होने का खामियाजा भारत को सबसे ज्यादा उठाना पड़ता है। साथ ही भारत ईरान में चाबहार पोर्ट परियोजना को अपनी भावी वैश्विक भूमिका के लिए बहुत जरूरी मानता है। लिहाजा वह आईआरजीसी को प्रतिबंधित करके ईरान के खिलाफ कोई मोर्चा नहीं खोलना चाहेगा।
दूसरी तरफ, इजरायली अधिकारियों का इस बात पर जोर है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच गहरी समझ और समन्वय की आवश्यकता है।
उनका कहना है कि आईआरजीसी की गतिविधियां न केवल मध्य पूर्व में बल्कि व्यापक एशियाई क्षेत्र में भी प्रभाव डाल रही हैं। वैसे दुनिया के 44 देश अभी तक आइआइरजीसी को प्रतिबंधित कर चुके हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2019 में आईआरजीसी को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। भारत से ईरान की यह अपील हाल के पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।