क्या ईरान में तख्तापलट की आहट? सरकारी तंत्र पर IRGC की बढ़ती पकड़, अमेरिकी थिंक टैंक का दावा…

अमेरिका-ईरान युद्धविराम की समयसीमा नजदीक आते ही ईरान की सत्ता के भीतर गहरे मतभेद उभरकर सामने आए हैं।

वॉशिगटन स्थित थिंक टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वार’ (आईएसडब्ल्यू) के विश्लेषण में दावा किया गया है कि तेहरान की नेतृत्व संरचना में शांति वार्ता को लेकर गंभीर विभाजन है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी के बीच अमेरिका से बातचीत के मुद्दे पर तीखी असहमति है।

IRGC पकड़ मजबूत कर रहा है

गलीबाफ जहां कूटनीतिक समाधान के पक्ष में दिख रहे हैं, वहीं आईआरजीसी का एक धड़ा वार्ता के खिलाफ खड़ा है।

विश्लेषण में कहा गया है कि अहमद वाहिदी की सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई तक सीधी पहुंच है, जिससे उनकी निर्णय प्रक्रिया में प्रभावशीलता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच में कठिनाई भी अमेरिका-ईरान वार्ता में बाधा बन रही है।

सत्ता का केंद्र सैन्य तंत्र की ओर शिफ्ट

थिंक टैंक ने यह भी संकेत दिया कि गलीबाफ का वार्ता की ओर झुकाव उनके घरेलू राजनीतिक हितों से भी जुड़ा हो सकता है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि आइआरजीसी का नियंत्रण और मजबूत होता है, तो गलीबाफ और विदेश मंत्री अराघची जैसे नेताओं की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

नेतृत्व परिवर्तन के गहरे परिणाम हो सकते हैं, जिसमें गलीबाफ को संसद अध्यक्ष पद से हटाया जा सकता है, जो गलीबाफ के लिए बड़ी हार होगी।

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