भाजपा नेता निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने नेट न्यूट्रलिटी (नेट निरपेक्षता) के उल्लंघन की चिंताओं पर दूरसंचार विभाग और ट्राई (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) से जवाब मांगा है।
समिति ने सिंगापुर, ब्रिटेन और अन्य देशों में 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग सेवाओं के प्रभाव की समीक्षा करने का निर्देश दिया है और दोनों विभागों को 25 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
प्रीपेड बनाम पोस्टपेड ग्राहकों का विवाद संसदीय समिति ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि कुछ टेलीकाम कंपनियों के ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान’ से देश के करोड़ों प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों का नुकसान हो सकता है।
बैठक में एक सदस्य ने बताया कि देश में केवल 10 प्रतिशत मोबाइल यूजर्स पोस्टपेड श्रेणी में आते हैं, जबकि भारी-भरकम 90 प्रतिशत आबादी प्रीपेड सेवाओं का लाभ उठाती है। ऐसे में कुछ चुनिंदा प्रीमियम ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क देना नेट न्यूट्रलिटी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है।
‘विशेष सेवाओं’ की परिभाषा और कंपनियों का रुख यह विवाद तब गहराया जब एयरटेल ने भारत की पहली कमर्शियल 5जी नेटवर्क-स्लाइसिंग सेवा ‘एयरटेल प्रायोरिटी पोस्टपेड’ लॉन्च की।
कंपनी का दावा है कि पश्चिमी देशों की तरह इस तकनीक से प्रीमियम यूजर्स को शानदार नेटवर्क परफार्मेंस मिलेगी। हालांकि, समिति के सदस्यों का मानना है कि वर्तमान में ‘विशेष सेवाओं’ की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, जिसका फायदा उठाकर टेलीकाम कंपनियां नियमों की कमियों का इस्तेमाल कर रही हैं। समिति इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करने के लिए जल्द ही मेटा, एक्स, गूगल और अमेजन जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफार्म्स को भी तलब कर सकती है।
क्या है 5जी स्लाइसिंग?
5जी स्लाइसिंग एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिये एक ही भौतिक 5जी नेटवर्क को कई वर्चुअल (आभासी) और स्वतंत्र नेटवर्कों में विभाजित किया जाता है। इसे आसान शब्दों में एक ही हाईवे को अलग-अलग ‘लेन’ में बांटने जैसा समझ सकते हैं, जहां हर लेन खास तरह के ट्रैफिक के लिए तय होती है।
4जी के समय एक ही नेटवर्क सभी तरह के कामों (जैसे फोन काल, इंटरनेट ब्राउजिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग) के लिए इस्तेमाल होता था। लेकिन 5जी स्लाइसिंग में टेलीकाम आपरेटर नेटवर्क के साफ्टवेयर का इस्तेमाल करके अलग-अलग ‘स्लाइस’ (टुकड़े) बना देते हैं। हर स्लाइस की स्पीड, सुरक्षा और क्षमता उस पर चलने वाले काम के हिसाब से सेट होती है।