क्या पाखंड या सत्य: दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ उज्जैन से रवाना-950 किमी का सफर, अयोध्या तक चलेगी 70 दिन…

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोट चोरी के दावों के बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर निकल चुके हैं।

मंगलवार को उज्जैन से इसकी शुरुआत करने से पूर्व इंदौर में मीडिया से चर्चा में उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि यह उनकी निजी यात्रा है, इससे कांग्रेस का कोई संबंध नहीं है। उधर, कांग्रेस भी स्पष्ट कर चुकी है कि इससे उसका कोई लेना-देना नहीं है।

दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता सड़क पर उतरें और उसके राजनीतिक मायने न हो, कैसे संभव है? फिलहाल दिग्विजय सिंह की कांग्रेस में स्थिति और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की दशा स्पष्ट करती है कि यात्रा क्यों व्यक्तिगत बताई गई और कांग्रेस नफे-नुकसान का आकलन कर कदम पीछे क्यों हटा रही है?

दरअसल, पदयात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से गुजरेगी। कोई शक नहीं कि यात्रा के दौरान राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का विषय न उठे। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को डर है कि दिग्विजय सवर्ण-सनातन कार्ड खेलकर विपक्षी गठबंधन के पीडीए नैरेटिव को बिगाड़ सकते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस ने इससे दूरी बना ली है।

राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की दूरी की वजह है कि चढ़ावा चोरी और मंदिर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने पर भाजपा इसे सनातन पर हमले के तौर पर पेश करेगी और कांग्रेस पर फिर तुष्टीकरण का ठप्पा लगेगा।

यात्रा के गैर राजनीतिक होने के बावजूद इसके गहरे राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं क्योंकि शुरुआत करते हुए दिग्विजय सिंह ने वोट चोरी और चढ़ावा चोरी के मुद्दे उठाने के साथ सनातन परंपरा और सामाजिक सरोकारों पर संवाद की बात कही है।

बता दें, दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को भगवान महाकाल और चिंतामन गणेश के दर्शन के बाद यात्रा शुरू की। करीब 930 किलोमीटर की यह पदयात्रा कई चरणों में पूरी होगी।

यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर जन संवाद किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पदयात्रा पर कहा कि कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को कोई काम नहीं दिया है इसलिए यात्रा पर निकले हैं।

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