क्या सत्ता बचाने के लिए Ali Khamenei ईरान को युद्ध की ओर धकेल रहे हैं? Donald Trump की चेतावनी और बढ़ती सैन्य तैनाती के बीच समझिए पूरा समीकरण…

जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या बढ़ रही है और जेनेवा में बातचीत पर रूख साफ नहीं हो पा रहा है, ईरान अब समझौते की बजाय संघर्ष के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान युद्ध की आशंका को पूरी तरह स्वीकार कर चुका है, भले ही डिप्लोमेसी का दरवाजा अभी खुला दिख रहा हो।

अमेरिकी युद्धपोतों की बढ़ती संख्या से ईरान परेशान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को साफ चेतावनी दी कि अगर कोई न्यूक्लियर डील नहीं हुई, तो यह उस देश और उसके लोगों के लिए बहुत बुरा दिन होगा।’ यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिकी अधिकारी और विशेषज्ञ ईरान पर हमले की तैयारियों को ‘स्ट्राइक-रेडी’ बता रहे हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के प्लान अब एडवांस्ड स्टेज पर पहुंच गए हैं, जिनमें लीडरशिप चेंज तक के विकल्प शामिल हैं। ईरान भी पीछे नहीं है।

वह अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी दे रहा है, अपनी सेनाओं को फिर से तैनात कर रहा है और अंदरूनी सुरक्षा कड़ी कर रहा है।

ओमान के विदेश मंत्री ने पुष्टि की कि अमेरिका-ईरान की बातचीत गुरुवार को जेनेवा में होगी, लेकिन यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत और मिसाइलों व क्षेत्रीय समूहों पर चर्चा को लेकर दोनों पक्ष अभी भी बंटे हुए हैं।

आठ महीनों में तैयारी

ईरान के नेता मानते हैं कि इस बार सत्ता बचाना सबसे बड़ा दांव है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि ईरान न्यूक्लियर साइटों को मजबूत कर रहा है, फैसले लेने का दायरा सीमित कर रहा है और असहमति पर सख्ती बढ़ा रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अली लारीजानी की मदद ली है। लारीजानी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख हैं और संकट के समय सरकार चलाने, अशांति दबाने और युद्ध की योजना बनाने का जिम्मा उनके पास है।

खामेनेई ने सीनियर अधिकारियों को चार लेयर का उत्तराधिकार बनाने का आदेश दिया है ताकि संचार कटने या उन्हें निशाना बनाए जाने पर भी सत्ता बिना रुके चलती रहे। लारीजानी ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘हम अपने देश में तैयार हैं।

हम निश्चित रूप से पहले से ज्यादा ताकतवर हैं, हमने पिछले सात, आठ महीनों में तैयारी की है, हमने अपनी कमजोरियों का पता लगाया है और उन्हें ठीक किया है। हम युद्ध नहीं चाहते हैं, और हम युद्ध शुरू नहीं करेंगे। लेकिन अगर वे हम पर ज़बरदस्ती करते हैं, तो हम जवाब देंगे।’

जवाबी हमले की ताकत 

ईरान की रक्षा रणनीति मिसाइलों, समुद्री रुकावट और क्षेत्रीय पहुंच पर टिकी है। उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में लाइव फायर ड्रिल की है और साफ कहा है कि हमले की सूरत में क्षेत्र के सभी अमेरिकी ठिकाने, सुविधाएं और संपत्तियां वैध निशाने होंगे।

खामेनेई ने चेतावनी दी, ‘दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को ऐसा झटका लग सकता है कि वह अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएगी।’ उन्होंने अमेरिकी युद्धपोतों को समुद्र की गहराई में भेजने वाले हथियारों का भी जिक्र किया।

विरोध प्रदर्शनों पर सख्त नजर

ईरान सिर्फ बाहरी हमले की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि अंदरूनी अशांति से भी निपटने की योजना बना रहा है। हाल ही में शरीफ यूनिवर्सिटी और तेहरान यूनिवर्सिटी में ‘औरतें, जिंदगी, आजाद’ के नारे लगे।

छात्रों ने खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन किए। सुरक्षा बलों ने गिरफ्तारियां और निगरानी तेज कर दी है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट कहती है कि तेहरान बड़े विद्रोह को रोकने के लिए पहले से ही अभियान चला रहा है।

क्यों तेज हुई ईरान की युद्ध मुद्रा?

चार बड़े कारण सामने हैं। पहला, ट्रंप की जल्दबाजी। दूसरा, ईरान को लगता है कि बातचीत सुरक्षा की बजाय जाल साबित हो सकती है।

तीसरा, पिछले 12 दिन के युद्ध से मिला सबक कि लंबा संघर्ष अमेरिका पर दबाव बना सकता है। चौथा, नेतृत्व को बचाने के लिए निरंतरता की मजबूत व्यवस्था।

ईरान अब सीमित समझौते की भी संभावना तलाश रहा है, जिसमें यूरेनियम का आधा हिस्सा विदेश भेजकर प्रतिबंधों में राहत मिल सके। लेकिन साथ ही वह सीमित हमलों का मुकाबला करने और जवाबी कार्रवाई से राजनीतिक लाभ उठाने को पूरी तरह तैयार है।

संक्षेप में, तेहरान बातचीत की मेज पर बैठा है, लेकिन युद्ध की पहली लहर से बचने, जोरदार जवाब देने और सड़कों पर काबू बनाए रखने की पूरी योजना बना चुका है।

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