“ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई स्वस्थ हैं, उनकी हालत ठीक है,” मोजतबा के उप-प्रतिनिधि ने सभी अटकलों को नकारा…

 ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर चल रही अफवाहों को खारिज करते हुए भारत में उनके उप-प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियाईनिया ने मंगलवार को कहा कि मोजतबा की हालत अच्छी है और वह ठीक हैं।

एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ”हमारे सुप्रीम लीडर हजरत अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई की हालत अच्छी है। दो दिन पहले हमारे बीच जो बातचीत हुई थी, उसके अनुसार उनकी हालत अच्छी है, वह ठीक हैं। ये सभी अफवाहें कि उनकी सेहत अच्छी नहीं है और उन्हें कुछ दिक्कतें हैं- ये सही नहीं है और वह ठीक हैं।”

पश्चिम एशिया युद्ध पर अपने देश के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि इजरायल व अमेरिका के साथ युद्ध ईरान ने शुरू नहीं किया था, लेकिन खत्म वही करेगा। यह युद्ध उनका देश निश्चित रूप से जीतेगा। दुश्मन अपना समय बर्बाद कर रहा है। उनके लिए बेहतर होगा कि वे युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की 10 शर्तों को मान लें।

युद्ध खत्म करने के प्रयासों और इसमें रूस, चीन एवं भारत की भूमिका के बारे में जियाईनिया ने कहा, ”हर देश कोई न कोई भूमिका निभा सकता है, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक।”

साथ ही कहा कि मध्यस्थता की प्रभावशीलता को उसके नतीजों से आंका जाना चाहिए, न कि उस देश से जो इसकी सुविधा दे रहा है। यह बात उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कही।

साथ ही कहा, ”हर कोई गैस या तेल की कीमतों को लेकर चिंतित है। लेकिन कोई भी उन लोगों की जान की कीमत को लेकर चिंतित नहीं है, जो मारे जा रहे हैं।”

जियाईनिया कहा कि ईरान की सरकारी व्यवस्था किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, क्योंकि यह एक गणतंत्र है। उन्होंने कहा, ”यह सवाल पश्चिमी मीडिया ने उठाया है। इस सवाल के दो कारण हैं। पहला- ईरान की सरकारी व्यवस्था के बारे में जानकारी नहीं होना।

दूसरा- सच छिपाने की कोशिश करना। ईरान की सरकारी व्यवस्था किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। इसलिए ऐसा नहीं है कि ईरान में कोई एक व्यक्ति सत्ता संभाल रहा है और उसके बिना देश ढह जाएगा। वहां एक पदानुक्रम है।”

उन्होंने कहा, ”एक वर्ष पहले दुश्मनों द्वारा लगाए गए अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों के कारण ईरान में कुछ हद तक फूट पड़ गई थी। लेकिन इस युद्ध के बाद अब कोई फूट नहीं है। ईरान के लोग एकजुट हैं।”

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