अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पिछले वर्ष अमेरिकी हमलों में क्षतिग्रस्त किए गए ईरान के इश्फहान परमाणु ठिकाने में दफ्न अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को ईरान या कोई अन्य समूह दोबारा हासिल कर सकता है।
खुफिया आकलनों के अनुसार यह यूरेनियम गैस के रूप में कंटेनरों में रखा गया है और भूमिगत सुरंग नेटवर्क के भीतर मौजूद है। अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी हमलों के बाद भी इस भंडार तक पहुंच का एक संकरा रास्ता बचा हुआ है, जिसके जरिए ईरान उसे निकालने की कोशिश कर सकता है।
अमेरिका रख रहा पैनी नजर
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इस यूरेनियम को कितनी तेजी से निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचा पाएगा। अमेरिकी जासूसी उपग्रह और अन्य निगरानी साधनों से इस ठिकाने पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी गतिविधि का तुरंत पता लगने का दावा किया गया है।
ईरान के पास कितना यूरेनियम?
अमेरिकी अधिकारियों का अनुमान है कि ईरान के पास लगभग 970 पाउंड अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम का भंडार है, जिसमें से अधिकांश इश्फहान में रखा गया है। यह यूरेनियम लगभग 60 प्रतिशत तक समृद्ध है, जिसे परमाणु हथियार बनाने के लिए करीब 90 प्रतिशत तक और समृद्ध करना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान की सेंट्रीफ्यूज क्षमता सक्रिय रही तो यह चरण अपेक्षाकृत जल्दी पूरा किया जा सकता है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के जारी सैन्य अभियान के बीच इस यूरेनियम का भविष्य ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा रणनीतिक मुद्दा बन गया है।
ट्रंप ने क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि फिलहाल अमेरिकी अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में विशेष बलों के जरिए इस यूरेनियम को सुरक्षित करने का विकल्प भी देखा जा सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
नेतन्याहू ने क्या कहा?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ने अपनी परमाणु और मिसाइल परियोजनाओं को इतनी गहराई में भूमिगत स्थानों पर पहुंचा दिया था कि वे लगभग किसी भी हमले से सुरक्षित हो गई थीं। उनके मुताबिक यही कारण था कि इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला किया।