त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच अब CBI के हाथों, पति और सास के खिलाफ FIR दर्ज; सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद कार्रवाई…

सुप्रीम कोर्ट ने त्विषा मौत मामले में न्यायपालिका के आरोपियों को बचाने की धारणा पर सोमवार को निराशा व्यक्ति की। कोर्ट ने कहा कि दुख हुआ यह सुनकर कि न्यायपालिका आरोपियों को बचा रही है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वे आम जनता से अनुरोध करते हैं कि वो अटकलों से बचे और सबसे प्रमुख जांच एजेंसी (सीबीआइ) पर भरोसा रखे। कहा कि उसे पूरा यकीन है कि सही समय आने पर एजेंसी जांच को उसके अंजाम तक जरूर पहुंचाएगी।

CBI करेगी त्विषा शर्मा केस की जांच

CBI ने इस मामले में BNS की धारा 80(2), 85, और 3(5) के तहत, साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत एक मामला दर्ज किया है।

सीबीआई की दर्ज की गई FIR के मुताबिक, त्विषा की शादी 9 दिसंबर, 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल वालों पर दहेज को लेकर उत्पीड़न करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि त्विषा को लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा।

इस मामले में आरोपी के तौर पर जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे हैं गिरिबाला सिंह (सास) और समर्थ सिंह (पति)। FIR के मुताबिक, त्विषा की मौत की जानकारी 12 मई, 2026 की रात करीब 10:20 बजे मिली।

पुलिस और मेडिकल जांच में पता चला कि महिला की मौत फांसी लगाने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ (antemortem hanging) की पुष्टि की, जिसका मतलब है कि फांसी तब लगाई गई थी जब पीड़िता जीवित थी।

इसके अलावा, शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोट के निशान पाए गए, जिनके बारे में माना गया कि वे किसी भारी वस्तु या शारीरिक हमले के कारण लगे थे। FIR के अनुसार, मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही अतिरिक्त दहेज की मांग की जा रही थी।

मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की धारा 6 के तहत अपनी सहमति देते हुए इस मामले को CBI को सौंप दिया।

इसके बाद, 25 मई, 2026 को केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने एक अधिसूचना जारी की, जिसमें CBI को पूरे मध्य प्रदेश राज्य में जांच करने का अधिकार दिया गया। CBI अब इस मामले में दहेज मृत्यु, उत्पीड़न, आपराधिक साजिश और अन्य संभावित अपराधों के आरोपों की जांच करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की वैधता पर कोई राय व्यक्त नहीं की है, सभी पहलुओं की जांच करना जांच एजेंसी का काम है। कोर्ट ने पीड़ित परिवार से अनुरोध किया कि वो सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाए जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं।

साथ ही मीडिया से भी अनुरोध किया कि वह गवाहों और संभावित आरोपियों के बयान रिकॉर्ड न करे, ऐसा करने से जांच प्रभावित हो सकती है। ये आदेश और टिप्पणियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने त्विषा शर्मा मौत मामले में स्वत: संज्ञान लेकर की जा रही सुनवाई के दौरान दिए।

12 मई को पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा अपने ससुराल भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में फंदे से लटकी मिली थी। त्विषा के माता-पिता ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। हालांकि त्विषा के ससुराल वालों ने दावा किया है कि उसे नशे की लत थी।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने त्विषा की मौत के मामले में मीडिया में आयी खबरों को देखते हुए स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह और उसकी सास, पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोपों में एफआइआर दर्ज की है।

सोमवार को सुनवाई में कोर्ट ने मीडिया से घटनाक्रम की रिपोर्टिंग में संयम बरतने का अनुरोध करते हुए कहा कि वे पीड़ित परिवार या दूसरे परिवार के बयानों पर न जाएं। चीजों को कानून और प्रक्रिया से चलने दें। पीड़ित परिवार के बायन रिकॉर्ड न करें और उनके दर्द को सिर्फ साउंड्स बाइट्स तक सीमित न करें। किसी तरह के नरेटिव (कहानी) बनाने से बचें।

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सीबीआइ जांच आज ही अपने हाथ में ले लेगी और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने त्विषा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया है। आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्दार्थ दवे ने मीडिया कवरेज पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आरोपी का पुलिस को दिया गया बयान अखबार में प्रकाशित हो चुका है।

सीजेआइ सूर्यकांत ने कहा कि हम उस कहानी के खिलाफ है जो गढ़ी जा रही है। इसलिए इस मामले को सीबीआइ को अपने हाथ में ले लेना चाहिए। हमें पुलिस और न्यायपालिका पर भरोसा है। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वह अधिकारियों से बात करके यह सुनिश्चित करेंगे कि सीबीआइ तुरंत जांच अपने हाथ में ले।

सॉलिसिटर जनरल ने त्विषा की मौत पर कहा कि एक बात तो स्पष्ट है कि उस लड़की ने अपनी जान गवां दी है। चाहें यह आत्महत्या हो या कुछ और। माता पिता के लिए तलाकशुदा बेटी होना मृत बेटी से बेहतर है। उसके मैजेसों से पता चलता है कि वह नरक में जी रही है।

कोर्ट ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि कानून है और प्रक्रिया का पालन होगा। न्यायमूर्ति बाग्ची ने घटनाओं के घटित होने की अल्पावधि पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समय भी देखना होगा, यह सब छह महीने में हो गया।

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