भारत ने शनिवार को कश्मीर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणियों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें देश के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गई अनुचित टिप्पणियों को पूरी तरह से खारिज करता है।
पत्रकारों से बात करते हुए जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान का मानवाधिकारों के मामले में खुद का रिकार्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनियाभर में चर्चा होती है। ऐसे में ये टिप्पणियां खास तौर पर हास्यास्पद हैं।
इस सच्चाई को देखते हुए राष्ट्रपति की टिप्पणियों को सिर्फ एक सोचे-समझे राजनीतिक हमले के तौर पर ही देखा जा सकता है, जो पाकिस्तान की कट्टरता और नफरत वाली राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित है।
आईएएनएस के अनुसार, भारत में धार्मिक स्थलों को गिराए जाने पर जरदारी की टिप्पणियों का भी जायसवाल ने कड़ा जवाब दिया। कहा कि अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और प्रताड़ित करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास रहा है। इसके लिए वह कुख्यात रहा है।
विदेश मंत्रालय का रुख
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का मानवाधिकारों के मामले में बेहद खराब रिकॉर्ड है, जिस पर वैश्विक स्तर पर चर्चा होती रहती है, ऐसे में ये टिप्पणियां विशेष रूप से बेतुकी हैं।”
जायसवाल ने आगे पाकिस्तान पर अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भेदभाव का लंबा इतिहास होने का आरोप लगाया और कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति देश के व्यवहार की व्यापक आलोचना हुई है।
ओआइसी की ओर से जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने को खारिज किया
भारत ने शुक्रवार को इस्लामी सहयोग संगठन (ओआइसी) की ओर से जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने को खारिज कर दिया और दोहराया कि यह इलाका देश का अटूट और अभिन्न हिस्सा है।
मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान और ओआइसी की ओर से भारत का जिक्र किए जाने के बाद हमें अपना पक्ष रखना पड़ रहा है।
आगे कहा कि हम पाकिस्तान के बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। हम ओआइसी की ओर से जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने को भी पूरी तरह खारिज करते हैं। पाकिस्तान का दुष्प्रचार उसकी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को समर्थन देने की बात छिपाने के लिए है।