राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया के पास ऐसा कोई मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है जो मानव जीवन के कई आयामों में एक साथ प्रगति सुनिश्चित कर सके।
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्थाएं व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक हितों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर भ्रमित हैं।
नागपुर में आरएसएस के प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में गुरुवार को भागवत ने कहा, दुनिया मानव शरीर, मन और बुद्धि के विकास को अलग-अलग समझती है, लेकिन ऐसा ढांचा विकसित करने में विफल रही है जो इन तीनों को साथ आगे बढ़ा सके। दुनिया नहीं जानती कि इन तीनों मोर्चों पर प्रगति कैसे हासिल की जाए।
उन्होंने कहा, अब भारत का समय आ गया है क्योंकि दुनिया संघर्ष-आधारित और स्वार्थी विकास माडलों के विकल्प तलाश रही है। भारत ऐतिहासिक रूप से ज्ञान, विज्ञान और आर्थिक शक्ति में विश्व का नेतृत्व करता रहा है। समय के साथ भुला दिए गए मूल्यों और शक्तियों को फिर से खोजा जाना चाहिए।
समकालीन वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि इनका असर उन देशों पर भी पड़ता है जो सीधे तौर पर इनमें शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर चुनौतियों और अनिश्चितताओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन ऐसी कठिन परिस्थितियों में मौजूद अवसरों को भी पहचानना चाहिए। भागवत का मानना था कि दुनिया में ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जो एक साथ सुख, शांति और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित कर सके।
राष्ट्र के साथ हमेशा खड़ा रहा है आरएसएस : कुमार मंगलम बिरला
उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला ने संघ की सराहना करते हुए कहा कि गुरुवार को कहा कि आरएसएस हमेशा समाज और राष्ट्र के साथ खड़ा रहा है। भले ही ये चुनौतीपूर्ण समय हो, लेकिन ये भारत का समय है।
आरएसएस स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए बिरला ने कहा, चुनौतियों के बावजूद राष्ट्र और समाज का मजबूती से साथ दिया है। बिरला ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।