इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को एक ”वैश्विक शक्ति” और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना ”व्यक्तिगत मित्र” बताते हुए राजनयिक मोर्चे पर पश्चिम एशिया में ‘हेक्सागन’ (षट्कोण) गठबंधन की परिकल्पना साझा की है।
इसमें भारत, अरब राष्ट्र, अफ्रीकी देश, ग्रीस, साइप्रस और एशियाई देशों को शामिल करने की योजना है।
नेतन्याहू के अनुसार, यह उन देशों का समूह होगा जो कट्टरपंथी शिया और सुन्नी खतरों के खिलाफ साझा दृष्टिकोण रखते हैं।
रविवार को कैबिनेट बैठक के दौरान नेतन्याहू ने घोषणा की कि पीएम मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल की दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक, राजनयिक और सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करना है। यह 2017 के बाद उनकी दूसरी ऐतिहासिक यात्रा होगी।
कूटनीतिक ‘हेक्सागन’ व कट्टरपंथ के खिलाफ धुरी नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया और उसके आसपास गठबंधनों की एक प्रणाली बनाने का विजन रखा, जिसे उन्होंने ‘हेक्सागन’ का नाम दिया।
उन्होंने कहा, ”इसमें भारत, अरब राष्ट्र, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागरीय देश (यूनान और साइप्रस) और एशिया के अन्य राष्ट्र शामिल होंगे।”
नेतन्याहू के अनुसार, यह केवल आर्थिक गलियारा नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक धुरी है। उन्होंने स्पष्ट किया, ”हमारा इरादा उन राष्ट्रों की एक धुरी बनाना है जो कट्टरपंथी शिया और उभरती कट्टरपंथी सुन्नी धुरी की चुनौतियों के खिलाफ समान दृष्टिकोण रखते हैं।”
यह विजन भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आइएमईसी) के उद्देश्यों से काफी मेल खाता है। सुरक्षा, एआइ और व्यक्तिगत केमिस्ट्री पर जोर दोनों नेताओं के बीच की ‘ब्रोमैंस’ का जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने 2017 की अपनी मशहूर समुद्र तट की मुलाकात को याद किया।
उन्होंने कहा कि तब से अब तक गंगा और जार्डन में बहुत पानी बह चुका है और दोनों देशों के संबंधों का ताना-बाना और मजबूत हुआ है।
दोनों देश हाई-टेक, एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और क्वांटम कंप्यूरिंटग में सहयोग बढ़ाएंगे। मोदी यरूशलम में एक नवाचार कार्यक्रम में भाग लेंगे और ‘याद वाशेम’ (होलोकास्ट मेमोरियल) का दौरा करेंगे। वह इजरायली संसद (क्रेसेट) को संबोधित भी करेंगे।
हालांकि, विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने धमकी दी है कि यदि परंपरा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को आमंत्रित नहीं किया गया, तो वे मोदी के संसदीय संबोधन का बहिष्कार करेंगे। यात्रा के दौरान आर्थिक, राजनयिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
नेतन्याहू ने इस यात्रा को वैश्विक मंच पर इजरायल की बढ़ती स्वीकार्यता और भारत के साथ अटूट दोस्ती के प्रमाण के रूप में पेश किया है।
अमेरिकी राजदूत के बयान पर विवाद इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकबी के एक बयान ने पश्चिम एशिया में हलचल मचा दी है।
एक इंटरव्यू के दौरान हकबी ने कहा कि इजरायल का पूरे पश्चिम एशिया (जार्डन, सीरिया, इराक और लेबनान के हिस्सों) पर अधिकार होना ”ठीक होगा”। हालांकि, भारी विरोध के बाद अमेरिका ने सफाई दी है कि उनके बयान को संदर्भ से हटकर पेश किया गया है।