इबोला वायरस के संकट से निपटने के लिए भारत ने अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्रों (सीडीसी) को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी है।
इसमें सुरक्षात्मक उपकरण, निदान एवं निगरानी उपकरण, संक्रमण रोकथाम सामग्री और दवाएं एवं पूरक शामिल हैं।
17 मई को डब्ल्यूएचओ ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि इससे पहले लगभग 2.5 टन चिकित्सा सामग्री की पहली खेप 24 मई को युगांडा के कंपाला के लिए भेजी गई, जिसमें सुरक्षात्मक उपकरण, चिकित्सा निगरानी उपकरण, आवश्यक दवाएं और पूरक आहार शामिल थे।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक पोस्ट में अफ्रीका सीडीसी को भेजी गई चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप के बारे में जानकारी और खेप की कुछ तस्वीरें साझा कीं।
उन्होंने कहा, ‘हमें विश्वास है कि 43 टन की यह खेप अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को और मजबूत करेगी तथा इबोला से निपटने की क्षमताओं को बढ़ावा देगी।’
इबोला के संदिग्ध मामलों की संख्या घटकर 116 रह गईः डब्ल्यूएचओ
रॉयटर के अनुसार, डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ कांगो में इबोला के प्रकोप में 321 पुष्ट मामले और 116 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जो संदिग्ध मामलों की संख्या में भारी गिरावट को दर्शाता है क्योंकि जांच के बाद सैकड़ों संदिग्ध मामलों को खारिज कर दिया गया है।
कांगो में इबोला से 48 लोगों की मौत हो चुकी है और छह लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, युगांडा ने इबोला के छह और नए मामलों की पुष्टि की है, जिससे देश में अब तक कुल पुष्ट मामलों की संख्या 15 हो गई है।
केन्या में इबोला क्वारंटाइन केंद्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में दो की मौत
केन्या के नान्युकी स्थित लाइकिपिया एयर बेस में अमेरिकी नागरिकों के लिए इबोला क्वारंटाइन केंद्र की स्थापना के विरोध में हुए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद दो लोगों की मौत हो गई।
एक जून को सैकड़ों लोग सैन्य अड्डे के द्वार पर जमा हुए और क्वारंटाइन केंद्र के विरोध में नारे लगाए। इसके बाद प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए।