भारत की डिजिटल क्रांति: 2027 में दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना और ऐतिहासिक जाति गणना की शुरुआत…

भारत अपनी 16वीं राष्ट्रीय जनगणना 2027) की तैयारी में जुट गया है, जो अब तक की सबसे बड़ी और सबसे आधुनिक जनगणना साबित होगी। कोविड-19 महामारी और अन्य कारणों से 2021 में निर्धारित जनगणना में देरी के बाद, यह अब 2026-2027 में दो चरणों में आयोजित होगी।

केंद्र सरकार ने इसकी लागत के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है, जिसमें लगभग 30 लाख फील्ड कार्यकर्ता (एन्यूमरेटर, पर्यवेक्षक आदि) तैनात किए जाएंगे।

यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी

पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया, स्व-गणना का विकल्प, और 1931 के बाद पहली बार सभी समुदायों के लिए जातिगत गणना शामिल होगी। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना अभ्यास होगी, जिसमें मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल होगा।

जनगणना क्यों महत्वपूर्ण है?

जनगणना भारत की जनसांख्यिकीय तस्वीर पेश करती है, जो नीति निर्माण, संसाधन आवंटन और विकास योजनाओं का आधार बनती है। यह डेटा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, शहरीकरण, प्रवासन, रोजगार और प्रजनन दर जैसे क्षेत्रों में रुझानों को समझने में मदद करता है। केंद्रीय अनुदान, सब्सिडी, राशन वितरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का फैसला भी इसी पर निर्भर करता है।

इस बार का राजनीतिक महत्व और भी अधिक है क्योंकि 2027 की जनगणना लोकसभा और विधानसभा परिसीमन का आधार बनेगी, जो 2002 से स्थगित है। साथ ही, महिला आरक्षण विधेयक (एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए) लागू होने के लिए भी यह जनगणना और उसके बाद का परिसीमन जरूरी होगा।

दो चरणों में होगी प्रक्रिया


चरण 1: हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (अप्रैल से सितंबर 2026 तक) — इसमें भवनों की सूची, निर्माण सामग्री, पेयजल, स्वच्छता, घरेलू संपत्ति, खाना पकाने का ईंधन आदि 33 मापदंडों पर डेटा एकत्र होगा। घर के मुखिया का लिंग (पुरुष/महिला/ट्रांसजेंडर) भी दर्ज किया जाएगा। नई दिल्ली में यह प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू हो सकती है।

चरण 2: पॉपुलेशन एन्यूमरेशन (फरवरी 2027) — व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम, आयु, लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय, धर्म, जाति/जनजाति, विकलांगता और प्रवास इतिहास दर्ज होगा। बेघर लोगों को भी शामिल किया जाएगा।

इस बार क्या खास है?

पहली पूरी डिजिटल जनगणना: मोबाइल ऐप (एंड्रॉइड/आईओएस) से डेटा संग्रह, ऑनलाइन स्व-गणना (16 भाषाओं में), जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी पोर्टल, जियो-टैगिंग और कोड डायरेक्टरी का उपयोग। गणनाकर्ता अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर सकेंगे।

जाति गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार सभी जातियों की गिनती होगी (एससी/एसटी को छोड़कर 1951 से यह बंद था)। ब्रिटिश काल (1881-1931) में यह नियमित था। जाति संबंधी सवाल दूसरे चरण में शामिल होंगे, और ड्रॉप-डाउन मेनू से राज्य-विशिष्ट सूची का उपयोग होगा।

स्व-गणना विकल्प: पात्र परिवार वेब पोर्टल पर अपना डेटा भर सकेंगे, जिसके बाद आईडी जनरेट होगी और गणनाकर्ता फील्ड विजिट में सत्यापन करेंगे।
सटीकता सुनिश्चित: गुणवत्ता जांच, पुनः सत्यापन और ऑडिट शामिल।

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और गृह मंत्रालय ने बताया कि यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत होगी। डेटा संग्रह के बाद अनंतिम आंकड़े पहले जारी होंगे, फिर विस्तृत रिपोर्ट।

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