ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों के प्रस्ताव पर भारत ने विरोध में वोट दिया…

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में पश्चिमी देशों द्वारा ईरान के खिलाफ लाए गए एक विवादास्पद वोटिंग प्रस्ताव में भारत ने अप्रत्याशित रूप से विरोध में मतदान किया।

इस कदम से भारत ने अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता का स्पष्ट प्रदर्शन किया है।

प्रस्ताव में ईरान पर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन भारत के वोट ने इसे और जटिल बना दिया।

चीन, पाकिस्तान, क्यूबा, इंडोनेशिया, इराक, विएतनाम जैसे कुछ गिने-चुने देशों ने ही इस प्रस्ताव का विरोध किया।

यह प्रस्ताव पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा पेश किया गया था, जिसमें ईरान की सरकार पर महिलाओं के अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति के दमन के आरोप लगाए गए थे।

भारत के इस फैसले पर नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने शनिवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- ‘भारत सरकार को ईरान इस्लामिक गणराज्य के प्रति संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में उसके सिद्धांतवादी एवं दृढ़ समर्थन के लिए मैं हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिसमें अन्यायपूर्ण एवं राजनीतिक दलों से प्रेरित एक प्रस्ताव का विरोध भी शामिल है।’

‘यह रुख भारत की न्याय, बहुपक्षवाद तथा राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।’

भारत ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कर स्पष्ट कर दिया कि वह जहां तक हो सकता है ईरान के साथ अपने सांस्कृतिक व कूटनीतिक संबंधों की हिफाजत करेगा। बता दें कि यूएनएचआरसी ने इस प्रस्ताव को 25 वोटों के बहुमत के साथ पास किया। सात वोट इसके खिलाफ पड़े और 14 सदस्यों ने वोट नहीं दिया।

भारत का फैसला क्षेत्रीय स्थिरता व बहुपक्षीय कूटनीति के सिद्धांत पर आधारित हाल ही में अमेरिकी सरकार ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर देश पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त टैक्स लगाने का फैसला किया है। ईरान में भारत की तरफ से विकसित किए जा रहे चाबहार पोर्ट पर भी अनिश्चितता छाई है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत का यह फैसला क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय कूटनीति के सिद्धांतों पर आधारित है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत पहले ही अमेरिकी दबाव के चलते ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर चुका है।

2019 में शुरू हुए प्रतिबंधों के बाद से भारत ने ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों को सीमित कर रखा है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र से लेकर अन्य कारोबारी गतिविधियां शामिल हैं। भारत इस तरह के प्रस्तावों के बारे में हमेशा से यह कहता रहा है कि वह मानवाधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी प्रस्ताव को राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त होना चाहिए।

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