भारत के पास सिर्फ कंटेंट नहीं, उसका संदर्भ भी है। एआई के तेजी से बदलते दौर में भी मानवीय रचनात्मकता को केंद्र में बनाए रखना होगा। भारत को बड़े कंटेंट बाजार से आगे बढ़कर दुनिया का प्रमुख रचनात्मक केंद्र बनने की दिशा में काम करना होगा।
ये बातें केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने फेडरेशन आफ इंडियन चेंबर्स आफ कामर्स (फिक्की) फ्रेम्स के 26वें संस्करण को संबोधित करते हुए कहीं।
शेखावत ने अगले दशक के लिए तीन महत्वपूर्ण बदलावों की जरूरत बताई। पहला, भारत को केवल कंटेंट का उपभोक्ता बनने से आगे बढ़कर कंटेंट निर्माण और रचनात्मकता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में काम करना होगा। दूसरा, भारत को केवल दर्शकों की संख्या के आधार पर आगे बढ़ने के बजाय मौलिक बौद्धिक संपदा को मजबूत करना होगा।
तीसरा, पर्दे पर दिखने वाली कहानियों को भारत के वास्तविक स्थानों और अनुभवों से जोड़ना होगा ताकि मनोरंजन और पर्यटन एक-दूसरे को मजबूत करें। अच्छी कहानियां लोगों को किसी स्थान की यात्रा के लिए प्रेरित कर सकती हैं और पर्यटन स्थानीय समुदायों के लिए समृद्धि के अवसर पैदा कर सकता है।
कहानी ही है असली सुपरस्टार : आयुष्मान
एक सत्र के दौरान अभिनेता आयुष्मान खुराना ने कहा, मैंने हमेशा माना है कि कहानी ही असली सुपरस्टार है। मेरा मानना है कि हम कई अलग-अलग ब्रह्मांडों में रह रहे हैं, जहां मनोरंजन की भी कई दुनिया है। हर दुनिया के अपने सितारे हैं। जैसे इंफ्लूएंसर, यूट्यूबर। कुछ सितारे बहुत बड़े हैं, लेकिन हो सकता है कि आपको उनके बारे में पता भी न हो।
वहीं कुछ ऐसे हैं, जिनके बारे में आपको पता हो। कुछ सितारे बेहद कम बोलते हैं, मीडिया से दूरी रखते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो लोगों से बातचीत करना पसंद करते हैं। मेरे लिए लोगों से जुड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि मैं रेडियो की पृष्ठभूमि से आता हूं और टेलीविजन प्रस्तोता भी रहा हूं। मेरे लिए लोगों के बीच सहज और उपलब्ध रहना जरूरी है, क्योंकि मेरी कहानियां जमीन से जुड़ी हैं।
अपने अंदर के कलाकार को जीवित रखने के लिए मुझे जमीनी स्तर के लोगों से बातचीत करते रहना जरूरी है। पहले स्टारडम विशिष्ट क्लब की तरह हुआ करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
सबसे सुंदर गीत अभी तक लिखा नहीं गया : प्रसून जोशी
एआई (आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस) को लेकर एक मत है कि आने वाले समय में ज्यादातर रचनात्मक लोगों का काम सही विचार चुनना रह जाएगा, जिसे एआइ तैयार करेगी।
इस बाबत गीतकार और लेखक प्रसून जोशी ने कहा, कई लोग मुझसे कहते हैं, मैंने आपकी तरह लिखने की कोशिश की और देखिए, एआई ने आपकी जैसी कविता लिख दी, लेकिन एआई उन्हीं चीजों पर काम करती है, जो पहले से व्यक्त की जा चुकी हैं, लेकिन सबसे सुंदर गीत अभी तक लिखा नहीं गया है। सबसे सुंदर सपना अभी तक देखा नहीं गया है। इसलिए इंसान के पास बढ़त रहेगी, क्योंकि हमारे भीतर बहुत कुछ ऐसा है जो अभी अव्यक्त है।
प्रसून ने कहा, आपने कोई तकनीक या एप से कुछ तैयार करवाया और फिर इनमें से उस विकल्प को चुना, जो आपकी भावनाओं को सबसे ज्यादा व्यक्त करता है। ऐसे में रचनाकार और उसकी रचना के बीच दिल से जुड़ाव की दूरी बढ़ती जाएगी। मुझे लगता है कि इससे रचना को नुकसान नहीं होगा, लेकिन रचनाकार को जरूर होगा, क्योंकि रचनाकार रचना की प्रक्रिया के आनंद से वंचित हो जाएगा। किसी चीज को धीरे-धीरे तराशने और लगातार बेहतर बनाने का जो सुख है, वह कम हो जाएगा।