भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर हमला करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना का स्थानीय लोगों के नरसंहार को सैन्य आपरेशन का रूप देना उन्हें उनके अपराध से दोषमुक्त नहीं करता है।
भारत ने पाकिस्तान के ‘व्यापार व परिवहन आतंकवाद’ और अफगानिस्तान के खिलाफ सैन्य हवाई हमलों की निंदा की है।
अफगानिस्तान की भूमि पर हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्य की संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
नरसंहार को सैन्य कार्रवाई बताने की निंदा की
भारत के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत हरीश पार्वथनेनी ने सोमवार को ‘अफगानिस्तान की स्थिति’ पर बैठक के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ तीखा हमला किया।
उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद एक “संगठित घृणा का कारखाना” चला रहा है, जो धार्मिक शब्दावली का उपयोग करके अपने नागरिकों में भारत के प्रति स्थायी दुश्मनी को बढ़ावा देता है, ताकि पाकिस्तान का “गहरा राज्य” सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रख सके।
पाकिस्तान पर प्रहार करते हुए भारत ने कहा कि ‘नरसंहार को सैन्य आपरेशन के रूप में प्रस्तुत करना अपराध से दोषमुक्त नहीं करता। नागरिकों की हत्या, घायल करना और अनाथ बनाना आतंकवाद के खिलाफ नहीं है।’
पार्वथनेनी ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता के उच्च सिद्धांतों का समर्थन करते हुए रमजान के दौरान निर्दयता से हवाई हमले करना पाखंड का उत्तम उदाहरण है।”
उन्होंने कहा कि “अपने विफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है। दुनिया को धोखा देने का यह प्रयास विफल होगा।’
तीन महीनों में 372 नागरिकों की मौत
पार्वथनेनी ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (यूएनएएमए) का हवाला देते हुए कहा कि इस वर्ष के पहले तीन महीनों में 372 नागरिकों की मौत हुई और 397 घायल हुए।
इनमें से अधिकांश रमजान के पवित्र महीने के दौरान हुआ। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मेज पर कहा,”कोई धर्म, कोई कानून और कोई नैतिकता ऐसे कार्यों को उचित नहीं ठहरा सकती।”
भारत ने पाकिस्तान के निर्देशों को भी दृढ़ता से खारिज कर दिया कि वह अपनी सीमाओं के भीतर समूहों को ‘फित्ना अल हिंदुस्तान’ के रूप में संदर्भित करना शुरू करे, इसे भारत के खिलाफ “संगठित घृणा के कारखाने” का परिणाम बताया। ‘फित्ना अल हिंदुस्तान’ वह शब्द है जिसका उपयोग बलूचिस्तान स्थित आतंकी समूहों के लिए करता है।