पाकिस्तान की सत्ता किसके हाथ में? डोनल्ड ट्रंप ने शहबाज शरीफ नहीं, आर्मी चीफ आसिम मुनीर का लिया नाम…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पाकिस्तान की सत्ता संरचना को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

ट्रंप ने अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत कई मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की, लेकिन इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नाम लेने के बजाय सीधे सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह का जिक्र किया।

ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ’ सोशल पोस्ट में कहा कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों को इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर उन्होंने कई नेताओं से बातचीत भी की है।

दिलचस्प बात यह रही कि जहां ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद और तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान का उनके आधिकारिक पदों के साथ उल्लेख किया, वहीं पाकिस्तान की ओर से उन्होंने ‘फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह’ का नाम लिया।

शहबाज शरीफ की अनदेखी पर चर्चा तेज

ट्रंप के पोस्ट में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नाम नहीं होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। पाकिस्तान में लंबे समय से सेना को सबसे ताकतवर संस्था माना जाता रहा है और विदेश नीति से लेकर सुरक्षा मामलों तक सेना का गहरा प्रभाव रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि आसिम मुनीर ने हाल के सालों में वॉशिंगटन में अपनी पकड़ मजबूत की है। अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों में आई ठंडक को कम करने के लिए इस्लामाबाद लगातार कोशिश कर रहा है। इसी बीच मुनीर की ट्रंप और उनके करीबी दायरे तक सीधी पहुंच को अहम माना जा रहा है।

ईरान मुद्दे पर भी सक्रिय भूमिका

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसिम मुनीर ईरान से जुड़े बैक-चैनल कूटनीतिक प्रयासों में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान की ईरान के साथ लंबी सीमा लगती है और इस्लामाबाद को आशंका है कि पश्चिम एशिया में लंबा संघर्ष उसके भीतर सांप्रदायिक तनाव, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।

अब्राहम अकॉर्ड्स पर पाकिस्तान की मुश्किल

ट्रंप का पाकिस्तान को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने का सुझाव बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से यह रुख अपनाता रहा है कि वह फलस्तीन के लिए स्वतंत्र राष्ट्र बनने तक इजरायल को मान्यता नहीं देगा। ऐसे में इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की किसी भी कोशिश का देश के भीतर तीखा विरोध हो सकता है।

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