इस चरण में SIR के तहत किसी भी दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी, प्रक्रिया 103 दिनों तक चलेगी – जानिए जरूरी बातें…

निर्वाचन आयोग (EC) ने देशभर में होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है।

बिहार में हुए SIR के अनुभवों के बाद आयोग ने अब पूरे देश में लागू होने वाले SIR के दौरान मतदाताओं से गणना चरण में कोई दस्तावेज नहीं मांगने का निर्णय लिया है।

आयोग के अनुसार, गणना चरण में कोई भी दस्तावेज एकत्र नहीं किया जाएगा। हालांकि, यदि किसी मतदाता को पिछले SIR से लिंक नहीं किया जा सका, तो ऐसे मतदाताओं को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा।

इस दौरान उनकी पात्रता की जांच संविधान के अनुच्छेद 326 में निर्धारित मानकों के अनुसार की जाएगी।

नागरिकता साबित करने के लिए 11 दस्तावेजों में से एक देना होगा

नए निर्देशों के अनुसार, ऐसे मतदाताओं को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए 11 संकेतात्मक दस्तावेजों में से कोई एक जमा करना होगा।

ये दस्तावेज वही रहेंगे जो बिहार SIR के दौरान मांगे गए थे। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड केवल पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा, न कि नागरिकता प्रमाण के रूप में। यह कदम आयोग के 9 सितंबर के निर्देशों के अनुरूप है। साथ ही, ERO को यह अधिकार होगा कि वह मतदाता द्वारा प्रस्तुत किसी अन्य वैकल्पिक दस्तावेज को भी स्वीकार कर सके।

फॉर्म में किए गए बदलाव

आयोग ने गणना फॉर्म में भी संशोधन किया है। अब इसमें मतदाता या उसके अभिभावक/रिश्तेदार के विवरण को दर्ज करने के लिए कॉलम जोड़े गए हैं- जैसे नाम, EPIC नंबर (यदि उपलब्ध हो), संबंध, जिला, राज्य और विधानसभा क्षेत्र का विवरण। यह जानकारी 2002-04 के बीच हुए पिछले SIR के रिकॉर्ड से जोड़ी जाएगी।

फील्ड स्तर पर BLO की भूमिका

जिन मतदाताओं के गणना फॉर्म वापस नहीं आएंगे, उनके मामलों में बूथ स्तर अधिकारी (BLO) पड़ोसियों से जानकारी लेकर संभावित कारण दर्ज करेंगे- जैसे कि मतदाता अनुपस्थित है, शिफ्ट हो गया है, मृत्यु हो गई है या उसका नाम दोहराया गया है।

ऐसे मतदाताओं की बूथवार सूची पंचायत, स्थानीय निकाय या BDO कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाएगी, साथ ही इन सूचियों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा।\

नए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 उपलब्ध

घर-घर जाकर की जाने वाली गणना के दौरान BLO अपने साथ कम से कम 30 खाली फॉर्म-6 और घोषणा फॉर्म लेकर चलेंगे, ताकि कोई नया मतदाता तत्काल नामांकन के लिए आवेदन कर सके। ERO आगामी योग्य तिथियों- 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2026 के लिए भी अग्रिम आवेदन स्वीकार करेंगे।

SIR की समयसीमा और कार्यक्रम

देशव्यापी SIR की अवधि 103 दिन होगी, जो बिहार SIR (98 दिन) से पांच दिन अधिक है। तैयारी संबंधी गतिविधियां- जैसे फॉर्म की छपाई 28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025 के बीच पूरी की जाएंगी।

इसके बाद 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 तक गणना का चरण चलेगा। इसी दौरान मतदान केंद्रों का पुनर्गठन भी किया जाएगा, ताकि किसी भी केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता न हों।

ड्राफ्ट मतदाता सूची 9 दिसंबर 2025 को प्रकाशित होगी। इसके बाद दावे और आपत्तियां 8 जनवरी 2026 तक स्वीकार की जाएंगी और 31 जनवरी 2026 तक सभी मामलों का निपटारा कर लिया जाएगा। अंततः, अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

एसआईआर का दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चार नवंबर से शुरू

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को कहा कि बिहार के बाद अब देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद आगामी चार नवंबर से शुरू होगी और अंतिम मतदाता सूची अगले साल फरवरी में प्रकाशित होगी।

दूसरे चरण में छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में एसआईआर कराया जाएगा। इनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में चुनाव संभावित हैं।

कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में स्पष्ट किया कि असम में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की घोषणा अलग से की जाएगी। असम में भी अगले साल विधानसभा चुनाव संभावित है। एसआईआर का दूसरा चरण चार नवंबर को गणना प्रक्रिया के साथ शुरू होगा और यह चार दिसंबर तक चलेगा। निर्वाचन आयोग नौ दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची जारी करेगा और अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।

कुमार ने असम के संदर्भ में कहा कि इस प्रदेश में नागरिकता अधिनियम का एक अलग प्रावधान लागू होता है। उनका कहना था, ‘‘”नागरिकता अधिनियम के तहत, असम में नागरिकता के लिए अलग प्रावधान हैं।

उच्चतम न्यायालय की निगरानी में नागरिकता की जांच का कार्य लगभग पूरा होने वाला है। 24 जून का एसआईआर आदेश पूरे देश के लिए था। ऐसी परिस्थितियों में यह असम पर लागू नहीं होता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए असम के लिए अलग से पुनरीक्षण आदेश जारी किए जाएंगे और एसआईआर की एक अलग तिथि घोषित की जाएगी।’’

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि मौजूदा एसआईआर स्वतंत्रता के बाद से ऐसी नौवीं कवायद है और पिछला एसआईआर 21 वर्ष पहले 2002-04 में हुआ था।

उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई और इसको लेकर कोई भी अपील नहीं आई जो इस कवायद की सबसे बड़ी खूबी रही।

कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा। एसआईआर यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी योग्य मतदाता का नाम छूट न जाए और किसी भी अयोग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘एसआईआर के दूसरे चरण में 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे। गणना प्रक्रिया चार नवंबर से शुरू होगी, जबकि मसौदा मतदाता सूची नौ दिसंबर को और अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।”

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ किसी भी टकराव की स्थिति बनने से भी इनकार किया। प्रदेश की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां जताई हैं।

कुमार का कहना था, ‘‘निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के बीच कोई टकराव नहीं है। आयोग एसआईआर प्रक्रिया को अंजाम देकर अपना संवैधानिक कर्तव्य निभा रहा है और राज्य सरकार भी अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करेगी।’’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने के लिए आयोग को आवश्यक कर्मी उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं।

स्थानीय निकाय चुनावों के कारण केरल में एसआईआर प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग पर, कुमार ने कहा कि प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। बिहार में मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम पूरा हो चुका है, जहां लगभग 7.42 करोड़ मतदाताओं की अंतिम सूची बीते 30 सितंबर को प्रकाशित की गई थी। राज्य में मतदान दो चरणों में होगा छह नवंबर और 11 नवंबर को होगा तथा मतगणना 14 नवंबर को होगी।

आयोग एसआईआर कराने की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ पहले ही दो बैठकें कर चुका है। कई सीईओ ने अपनी पिछली एसआईआर के बाद की मतदाता सूचियां अपनी वेबसाइटों पर डाल दी हैं।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूची उपलब्ध है, जब राष्ट्रीय राजधानी में अंतिम गहन पुनरीक्षण हुआ था। उत्तराखंड में अंतिम एसआईआर 2006 में हुआ था और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

राज्यों में अंतिम एसआईआर उसी तरह से ‘कट-ऑफ’ तिथि के रूप में काम करेगी जैसे बिहार की वर्ष 2003 की मतदाता सूची का उपयोग चुनाव आयोग ने गहन पुनरीक्षण के लिए किया था। अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची का अंतिम एसआईआर 2002 और 2004 के बीच था और उन्होंने अपने-अपने राज्यों में हुए अंतिम एसआईआर के अनुसार वर्तमान मतदाताओं का मानचित्रण लगभग पूरा कर लिया है।

एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य अवैध विदेशी प्रवासियों की जांच करके उनका नाम मतदाता सूची से बाहर करना है। बांग्लादेश और म्यांमार सहित विभिन्न देश के अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर यह कदम महत्वपूर्ण हो जाता है।

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