चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अहम बैठक हुई।
इसमें पीएम मोदी ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान को करारा झटका दिया और बताया कि इससे न सिर्फ भारत, बल्कि चीन भी प्रभावित रहा है। जिनपिंग ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अपना समर्थन भी दिया है।
उल्लेखनीय है कि भारत लंबे समय से आतंकवाद झेलता रहा है। पड़ोसी पाकिस्तान भारत के खिलाफ कई दशकों से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है।
ऐसे में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाकर भारत ने चीन के सामने बिना नाम लिए पाकिस्तान की ही पोल खोल दी और उस पर चीन का समर्थन भी हासिल कर लिया।
सीमा पार आतंकवाद पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “प्रधानमंत्री ने सीमा पार आतंकवाद को प्राथमिकता बताया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह भारत और चीन दोनों को प्रभावित करता है, और इसलिए यह जरूरी है कि हम सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए एक-दूसरे को समझ और समर्थन दें।
मैं तो यह कहना चाहूंगा कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मौजूदा दौर में सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे से निपटने में हमें चीन की समझ और सहयोग मिला है।”
इसके अलावा, चीन के साथ सीमा विवाद पर भी बात हुई और सीमा पर शांति बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के लिए एक बीमा पॉलिसी की तरह है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस स्थिति से अवगत कराया।
दोनों नेताओं ने दिन में व्यापक चर्चा की, जिसका मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करना था, जो पिछले साल अक्टूबर में समाप्त हुए पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय से चल रहे सीमा गतिरोध के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे।
ऑपरेशन सिंदूर में चीन ने किया था पाक का सपोर्ट
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई की शुरुआत में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। भारत ने सात मई को पाकिस्तान और पीओके के नौ ठिकानों पर हवाई हमले करके लश्कर और जैश के 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर कर दिया था।
इसके बाद दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया। चार दिनों तक चले संघर्ष में पाकिस्तान ने भी भारत पर ड्रोन से हवाई हमले की कोशिश की थी, जोकि नाकाम रही थी।
तुर्किए और चीन ने पाकिस्तान को इस दौरान अपना खुलकर समर्थन किया था। पाकिस्तान ने चीन के बने फाइटर जेट्स और तुर्किए के ड्रोन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ अपनी लड़ाई में किया था। हालांकि, चार दिनों में ही भारत ने पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे वह सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा था।