सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: आंशिक कार्य दिवसों पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं की बहस पर रोक…

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि न्यायालय के आंशिक कार्य दिवसों के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न तो मामलों को तत्काल सूचीबद्ध कराने की अनुमति दी जाएगी और न ही सूचीबद्ध मामलों में दलीलें रखने की।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कदम सोमवार से 12 जुलाई तक न्यायालय के आंशिक कार्य दिवसों के दौरान युवा वकीलों को अपने मामलों में दलीलें रखने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

शीर्ष अदालत में ग्रीष्मावकाश को अब न्यायालय के आंशिक कार्य दिवस कहा जाता है। इस साल इस अवधि के दौरान प्रत्येक सप्ताह तीन से चार पीठ सुनवाई करेंगी।जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “मेरी अदालत में किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को अनुमति नहीं दी जाएगी।”

जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले का उल्लेख करने का प्रयास किया तो न्यायमूर्ति नाथ ने स्पष्ट किया कि इस अवधि के दौरान केवल युवा वकीलों और एडवोकेट-आन-रिकार्ड को दलीलें रखने की अनुमति होगी।

हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि जिन मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हो रहे हैं, उन्हें खारिज नहीं किया जाएगा और उन्हें सामान्य कार्यदिवस के बाद जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की एक अन्य पीठ ने भी कहा कि न्यायालय के आंशिक कार्य दिवसों के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मामलों का उल्लेख करने या दलीलें रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यदि कनिष्ठ अधिवक्ता मामलों में दलीलें रखते हैं तो नोटिस जारी होने की संभावना अधिक है और यदि वरिष्ठ अधिवक्ता दलीलें रखते हैं तो मामला खारिज होने की संभावना अधिक है। एक अन्य न्यायमूर्ति संजय करोल ने भी इसी तरह की टिप्पणी की। 

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