मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के चलते भारत में सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि, इसका असर बुनियादी ढांचे पर दिखने लगा है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण भारत में डामर (तारकोल) की भारी कमी हो गई है, जिससे नई सड़कों के निर्माण और पुरानी सड़कों के रखरखाव (मेंटेनेंस) पर ब्रेक लग सकता है।
डामर की सप्लाई कम होने से कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। ऐसे में देश में सड़कों के निर्माण के लिए एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है। अगर पर्याप्त मात्रा में डामर उपलब्ध नहीं होता है तो सड़कों के निर्माण पर भी ब्रेक लग सकती है।
6 लाख टन डामर की आवश्यकता
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद से डामर के सबसे आम ग्रेड (VG-40) की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। 15 जुलाई तक सिफ हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग छह लाख टन डामर की आवश्यकता है, लेकिन जरुरत के मुताबिक डामर की उपलब्धता न के बराबर है।
क्रूड आयल की कमी
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि भारत रूस से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीदकर कच्चे तेल की कमी से जूझने में कामयाब रहा है, लेकिन यह तेल सड़कों को रफ्तार देने वाले बिटुमेन का संकट दूर नहीं कर पा रहा है। क्योंकि, रूस से आने वाला स्वीट क्रूड उस बाय-एन ग्रेड का प्रोडक्शन नहीं कर सकता जो इसके लिए सही है।