मध्य पूर्व में चल रहे संकट के कारण निर्यात में बाधा और घरेलू आपूर्ति बढ़ने से बाजार के रुझानों में बदलाव आया है, जिसके चलते अंडों की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।
जहां वैश्विक तनाव के कारण ईंधन और खाद्य तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं पोल्ट्री क्षेत्र उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत दे रहा है। हालांकि, मांग में कमी के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अंडे के दामों में गिरावट
सूत्रों के अनुसार, घरेलू बाजार में अंडे की कीमतों में प्रति पीस 2 से 3 रुपये की गिरावट आई है। जहां उपभोक्ताओं को सस्ते अंडों का लाभ मिल रहा है, वहीं पोल्ट्री किसानों को घटती मांग के कारण नुकसान हो रहा है।
यह गिरावट मुख्य रूप से निर्यात बंद होने और स्थानीय आपूर्ति बढ़ने के कारण हुई है। इसके अलावा, एलपीजी की कमी के कारण छोटे खाद्य व्यवसायों पर असर पड़ा है, जिससे मांग में भी कमी आई है और कीमतें नीचे आई हैं।
ईरान-इजराय संघर्ष से घरेलू बजट प्रभावित
इस बीच, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब आम बाजारों पर भी साफ दिखने लगा है, जिससे देशभर में घरेलू बजट प्रभावित हो रहे हैं। रसोई से लेकर स्थानीय बाजार तक, बढ़ती कीमतों ने दैनिक जरूरतों को महंगा कर दिया है, जिससे आम उपभोक्ता आर्थिक दबाव में हैं।
सबसे बड़ा असर खाने के तेल की कीमतों पर पड़ा है। हाल के दिनों में पाम ऑयल, सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल और सरसों तेल की कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है।
इस तेज वृद्धि ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है, खासकर गृहिणियों के लिए रसोई का खर्च संभालना मुश्किल हो गया है।
शिपिंग मार्ग प्रभावित
कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं की वजह से है। शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे देरी और परिवहन लागत में वृद्धि हुई है।
चूंकि भारत खाद्य तेलों के लिए आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने भी वस्तुओं की कुल लागत को और बढ़ा दिया है। इसका असर केवल घरों तक सीमित नहीं है।
होटल, रेस्टोरेंट और फूड वेंडर भी बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं, जिसका असर धीरे-धीरे उपभोक्ताओं के लिए खाने-पीने की चीजों की कीमतों में दिखाई देने लगा है।