भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने बृहस्पतिवार को दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का दौरा किया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के निर्माण में इस्तेमाल की गई आधुनिक तकनीकों, इंजीनियरिंग की चुनौतियों और निर्माण प्रक्रियाओं को करीब से समझा।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) की ओर से आयोजित इस शैक्षणिक दौरे का उद्देश्य विद्यार्थियों को बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के निर्माण, संचालन और रखरखाव का व्यावहारिक अनुभव देना था।
विद्यार्थियों ने सबसे पहले सराय काले खां स्टेशन का दौरा किया। यहां उन्हें मेट्रो, वीर हकीकत राय आइएसबीटी, रिंग रोड और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन सुविधाओं की जानकारी दी गई। फुट ओवरब्रिज पर लगी ट्रैवलेटर सुविधा के बारे में भी बताया गया।
दुहाई स्टेशन तक सफर किया
इसके बाद विद्यार्थियों ने नमो भारत ट्रेन से दुहाई स्टेशन तक सफर किया। यहां उन्हें यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और मेरठ में इसी बुनियादी ढांचे पर संचालित हो रही स्थानीय मेट्रो सेवा की जानकारी मिली।
दुहाई स्थित नमो भारत डिपो में आयोजित तकनीकी सत्र में अधिकारियों ने दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ में कारिडोर निर्माण के दौरान आई इंजीनियरिंग संबंधी चुनौतियों के बारे में बताया।
डिजाइन में बदलाव किए
उन्होंने समझाया कि घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों और भूमिगत उपयोगिता सेवाओं के बीच निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए सटीक योजना, संरचनात्मक निगरानी और जरूरत के अनुसार डिजाइन में बदलाव किए गए।
विद्यार्थियों ने आपरेशन कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) का भी दौरा किया, जहां उन्हें ट्रेन संचालन, प्लेटफार्म स्क्रीन डोर और ट्रेनों के प्रबंधन की जानकारी दी गई। इसके अलावा एनसीआरटीसी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ‘अपरिमित’ में वर्चुअल रियलिटी (वीआर), आगमेंटेड रियलिटी (एआर) और बिल्डिंग इंफार्मेशन माडलिंग (बीआइएम) जैसी तकनीकों से रूबरू कराया गया।