अगर नीयत सही हो तो सूर्यास्त के बाद तिरंगा उतारना अपराध नहीं माना जाएगा,केरल हाईकोर्ट का फैसला…

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद राष्ट्रीय ध्वज को सूर्यास्त के बाद न उतारने के आरोप में दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

यह मामला अंगमाली नगरपालिका के पूर्व सचिव वीनू सी कुंजप्पन के खिलाफ दर्ज हुआ था, जिन पर राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 की धारा 2(a) के तहत भारतीय ध्वज का अपमान करने का आरोप था।

न्यायमूर्ति काउसार एदप्पागथ की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि जब तक जानबूझकर और अपमान की मंशा से ऐसा न किया गया हो, तब तक ध्वज को सूर्यास्त के बाद न उतारना अपने आप में कोई अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने कहा, “जब तक राष्ट्रीय ध्वज का अपमान या अनादर करने की मंशा के साथ कोई जानबूझकर किया गया कृत्य न हो, तब तक 1971 के अधिनियम की धाराएं लागू नहीं की जा सकतीं। इस मामले में कोई भी ऐसा साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करे कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर ध्वज नहीं उतारा।”

क्या है मामला?

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अगस्त 2015 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अंगमाली नगरपालिका परिसर में भारतीय ध्वज फहराया गया था।

आरोप है कि सचिव कुंजप्पन की उपस्थिति में फहराया गया यह ध्वज निर्धारित समय (सूर्यास्त) के बाद भी नहीं उतारा गया और 17 अगस्त दोपहर तक लहराता रहा। इसको लेकर अंगमाली पुलिस ने ध्वज संहिता, 2002 के नियम 3.6 के साथ राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 की धारा 2(a) के तहत स्वयं संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की थी।

कोर्ट की कानूनी व्याख्या

कोर्ट ने कहा कि 1971 के अधिनियम की धारा 2 में जिन कृत्यों को “अपमानजनक” माना गया है उनमें ध्वज को सूर्यास्त के बाद न उतारना शामिल नहीं है। इसमें ध्वज को जलाना, फाड़ना, जमीन पर गिराना, या उसका अनुचित उपयोग करने जैसे कृत्यों को शामिल किया गया है।

साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फ्लैग कोड इंडिया, 2002 कोई वैधानिक कानून नहीं है बल्कि यह केंद्र सरकार की ओर से जारी कार्यकारी निर्देश हैं। ऐसे निर्देशों का उल्लंघन अपने आप में आपराधिक दंड का आधार नहीं बन सकता, जब तक कोई अलग वैधानिक प्रावधान न हो। कोर्ट ने कहा, “फ्लैग कोड, 2002 एक आचार संहिता है, न कि संविधान के अनुच्छेद 13(3)(a) के तहत परिभाषित कोई कानून। अतः इसका उल्लंघन दंडनीय नहीं है जब तक कि अपमान की स्पष्ट मंशा न हो।”

अंतिम निर्णय

कोर्ट ने पाया कि पूर्व सचिव कुंजप्पन के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह दर्शाए कि उन्होंने जानबूझकर या अपमान की नीयत से ध्वज नहीं उतारा। इस आधार पर, हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट कोर्ट, अंगमाली में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

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