IELTS Rules 2026: परीक्षा और आसान! कंप्यूटर-आधारित टेस्ट व ‘सेक्शन रिटेक’ का बड़ा बदलाव-क्या हैं नए नियम?…

विदेश में पढ़ाई या नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अंग्रेजी भाषा दक्षता परीक्षा IELTS (International English Language Testing System) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है।

परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं आईडीपी और ब्रिटिश काउंसिल ने घोषणा की है कि जून 2026 से पारंपरिक पेन-पेपर मोड को समाप्त कर परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित किया जाएगा।

हालांकि जिन छात्रों को कीबोर्ड पर टाइप करने में दिक्कत होती है, उनके लिए राइटिंग सेक्शन के लिए कागज पर लिखने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। ऐसे उम्मीदवारों को बाकी तीन सेक्शन कंप्यूटर पर ही देने होंगे।

12 हजार से अधिक संस्थानों में प्रवेश के लिए जरूरी

यूके, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में दाखिले तथा नौकरी के लिए IELTS क्वालिफाई करना अनिवार्य होता है। इस परीक्षा के आधार पर दुनिया भर के 12 हजार से अधिक संस्थान छात्रों को प्रवेश देते हैं।

अब एक सेक्शन फिर से देने की सुविधा

परीक्षा प्रणाली में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। यदि किसी उम्मीदवार के Writing, Reading, Listening या Speaking के सेक्शन में से किसी एक में कम अंक आते हैं तो उसे पूरी परीक्षा दोबारा नहीं देनी होगी। उम्मीदवार 60 दिनों के अगर केवल कम अंक वाले सेक्शन की परीक्षा देकर अंक सुधार सकता है।

ऐसा होता है परीक्षा का पैटर्न

IELTS परीक्षा चार भागों में होती है।

Listening: 30 मिनट में 40 प्रश्न करने होते हैं।

Reading: 60 मिनट में 40 प्रश्न करने होते हैं।

Writing: 60 मिनट में 2 टास्क (ग्राफ/चार्ट और निबंध) करना होता है।

Speaking: 11 से 14 मिनट में तीन चरणों में बातचीत व सामान्य प्रश्न करने होते हैं।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा के फायदे

कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट लागू होने से छात्रों को कई फायदे होंगे:-

  • परिणाम 3–4 दिनों में जारी होगा, जबकि पेपर मोड में 13 दिन लगते थे।
  • परीक्षा के अधिक स्लॉट उपलब्ध होंगे।
  • राइटिंग सेक्शन में शब्दों की गिनती स्वतः हो जाएगी।
  • खराब हैंडराइटिंग के कारण अंक कटने की समस्या नहीं रहेगी।
  • पैसेज और प्रश्न एक ही स्क्रीन पर देखने की सुविधा मिलेगी।

पात्रता और परीक्षा शुल्क

IELTS परीक्षा 16 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी उम्मीदवार दे सकता है, जिसके पास वैध पासपोर्ट हो। इसके लिए किसी विशेष शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है।

साल भर में अधिकतम 48 स्लॉट में यह परीक्षा आयोजित होती है। फिलहाल परीक्षा शुल्क 18 हजार रुपये है, जिसे एक अप्रैल से बढ़ाकर 19 हजार रुपये कर दिया जाएगा।

दो साल तक मान्य रहता है स्कोर

IELTS का स्कोर बैंड सिस्टम में मापा जाता है। भारत में औसत बैंड स्कोर लगभग 6.0 से 6.3 के बीच रहता है, जबकि करीब 20–25 प्रतिशत छात्र ही 7 या उससे अधिक बैंड हासिल कर पाते हैं। परीक्षा का स्कोर जारी होने की तारीख से दो साल तक मान्य रहता है। इसके बाद प्रवेश के लिए छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है।

इन देशों में सबसे अधिक रुझान

भारतीय छात्र विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड, आयरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और मलेशिया में पढ़ाई के लिए आवेदन करते हैं। 

ऑनलाइन मॉक टेस्ट की सुविधा

परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र IDP IELTS की वेबसाइट पर जाकर मॉक टेस्ट भी दे सकते हैं। इसमें ऑडियो और लिखित फॉर्मेट में चार प्रकार के प्रैक्टिस टेस्ट उपलब्ध हैं, जिन्हें छात्र अपनी सुविधा के अनुसार दे सकते हैं।

हर वर्ष औसतन 13 लाख भारतीय छात्र IELTS परीक्षा देते हैं, जो विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सबसे लोकप्रिय अंग्रेजी भाषा परीक्षणों में से एक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *