महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे एक बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। राज्य विधानसभा में उनके तबादले की कथित कोशिश और इसमें ‘इंटरनेशनल ड्रग माफिया’ की मिलीभगत को लेकर सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग लॉबी ने एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे का तबादला सुनिश्चित करने के लिए 250 करोड़ रुपये जमा किए हैं।
‘रैकेट में शामिल लोगों के नाम करूंगा उजागर’
उन्होंने आरोप लगाया कि फार्मास्युटिकल और फूड सेक्टर के ताकतवर लोग और भ्रष्ट अधिकारी मिलावट और गैर-कानूनी व्यापार के खिलाफ आईएएस अधिकारी की सख्ती से नाखुश थे। आव्हाण ने कहा, “मैं अगले सोमवार को विधानसभा में इस रैकेट में शामिल सभी बड़े लोगों के नाम उजागर करूंगा।”
बीजेपी विधायक ने की मुंढे की तारीफ
यह मामले ने सदन में तब तूल पकड़ लिया जब बीजेपी विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने मुंढे के काम की तारीफ की और कहा कि अधिकारी को कम से कम तीन साल तक इस पद पर बने रहना चाहिए। शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर ने दावा किया कि मुंढे को जान से मारने की धमकियां मिली हैं और उनके लिए सुरक्षा बढ़ाने की मांग की।
इस बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के खाद्य और औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने तुरंत तबादले की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मुंढे को पद से हटाने का कोई सवाल ही नहीं उठता और उनके काम को असरदार बताया। हालांकि, मंत्री ने माना कि विभाग को अभी भी गाड़ियों और बुनियादी ढांचे की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
कौन हैं तुकाराम मुंढे?
महाराष्ट्र के सबसे जाने-माने आईएएस अधिकारियों में से एक तुकाराम हरिभाऊ मुंढे ने समझौता न करने वाले और पूरी तरह से स्वतंत्र अधिकारी के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। मुंढे एक छोटे किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता हरिभाऊ मुंढे एक छोटे किसान थे, जबकि उनकी मां आसराबाई मुंढे मुश्किल आर्थिक हालात में भी घर संभालती थीं।
मुंढे जिला परिषद स्कूल में अपनी पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल से पहले और बाद में परिवार के खेत में काम करते थे। बाद में उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और 2004 में ऑल इंडिया रैंक 20 के साथ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की।
2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी मुंढे ने नांदेड़, वाशिम, जालना, सोलापुर, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और पुणे में कई अहम पदों पर काम किया है। उन्होंने असिस्टेंट कलेक्टर, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, म्युनिसिपल कमिश्नर और पीएमपीएमएल के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम किया है और कई सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव पदों पर भी रहे हैं।
सोलापुर के कलेक्टर के तौर पर उन्हें जल प्रबंधन और पारदर्शी प्रशासन में सुधार के लिए पहचाना गया और 2015-16 के लिए महाराष्ट्र सरकार का बेस्ट डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर अवॉर्ड मिला। उन्हें महाराष्ट्र के वॉटरमैन के तौर पर भी सम्मानित किया गया है।
बार-बार तबादलों के लिए जाने जाते हैं मुंढे
मुंढे का करियर उनके प्रशासनिक अंदाज के साथ-साथ बार-बार होने वाले तबादलों के लिए भी चर्चा में रहा है। नियमों को सख्ती से लागू करने, गड़बड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने और किसी भी तरह का समझौता न करने के उनके रुख की वजह से अक्सर उनका टकराव उन लोगों से हुआ है जिनके अपने निजी हित जुड़े होते हैं। बताया जाता है कि सेवा के लगभग दो दशकों में उनका 24 से ज्यादा बार तबादला हो चुका है।
मुंढे का एक्शन
एफडीए कमिश्नर का पद संभालने के बाद से मुंढे ने हाल के वर्षों में विभाग के सबसे आक्रामक एनफोर्समेंट अभियानों में से एक शुरू किया है। पद संभालने के लगभग पहले महीने में ही एफडीए ने पूरे महाराष्ट्र में 904 छापे मारे और 34.66 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला जब्त किया।
विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि वह संगठित गुटखा सिंडिकेट के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत कार्रवाई कर सकता है। उनके प्रशासन ने तंबाकू उत्पादों से आगे बढ़कर अपना दायरा बढ़ाया है।
होटलों, रेस्तरां और सड़क किनारे बने खाने-पीने के ठिकानों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्राहकों को बोतल बंद पानी खरीदने के लिए मजबूर करने के बजाय उन्हें मुफ्त में साफ पीने का पानी उपलब्ध कराएं।
अस्पतालों को भी चेतावनी दी गई है कि वे मरीजों को सिर्फ उनसे जुड़ी फार्मेसी से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर न करें। साथ ही यह भी दोहराया गया है कि मरीज किसी भी लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।
एफडीए ने साथ ही साथ खाने-पीने की चीजों में मिलावट के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है, जिसमें डेयरी प्रोडक्ट्स, मावा, खाने के तेल और दूसरी खाद्य सामग्री को निशाना बनाया जा रहा है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और बड़े फूड ब्रांड्स की भी फूड सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर कड़ी जांच-पड़ताल की जा रही है।
विभाग के अनुसार, प्रवर्तन अभियानों के परिणामस्वरूप प्रतिष्ठानों को सील किया गया, 457 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 42 वाहनों को जब्त किया गया।
बढ़ता जनसमर्थन
मुंढे के हालिया कदमों से उन्हें लोगों का असाधारण समर्थन भी मिला है। परभणी के गार्डियन सेक्रेटरी के तौर पर उनकी अतिरिक्त जिम्मेदारी वापस लिए जाने के बाद उनके संभावित तबादले की अटकलें शुरू हुईं। इसके बाद सांगली में उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से उन्हें एफडीए कमिश्नर के पद पर बनाए रखने की मांग की।
पानी संघर्ष समिति के सदस्यों ने मुंढे की तस्वीर का दूध से अभिषेक किया और एक ज्ञापन सौंपकर अधिकारी के लिए कम से कम तीन साल के कार्यकाल की मांग की। समर्थकों का तर्क था कि मिलावटी खाने-पीने की चीजों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई से न सिर्फ लोगों की सेहत की रक्षा हुई, बल्कि नकली और घटिया उत्पादों के खिलाफ कदम उठाकर किसानों के हितों की भी सुरक्षा की गई।
उनका कहना था कि यह आंदोलन राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करने के लिए था कि एक ईमानदार अधिकारी अपना काम जारी रख सके।