नीट-यूजी के लीक हुए प्रश्नों के पीछे वैसे तो कई एंगल सामने आ रहे है लेकिन इनमें से एक अहम एंगल नासिक प्रिंटिंग प्रेस को लेकर भी है, जहां प्रश्न पत्रों की छपाई के लिया भेजा गया था।
दावा यह किया जा रहा है कि छपाई के दौरान ही प्रिंटिंग प्रेस से ही प्रश्नों को लीक किया गया है। जिन्हें बाद में बड़े ही शातिराना ढंग से सेंपल व गेस पेपर के रूप में छात्रों को पैसे लेकर बेचा गया।
यदि इस एंगल में सच्चाई है तो यह तब हुआ है, जब हाईपावर कमेटी ने एनटीए को प्रश्न पत्रों की छपाई और परिवहन के जोखिमों से सतर्क किया था। साथ ही इससे बचने के लिए अहम सुझाव भी दिए थे।
नीट-यूजी परीक्षा में 2024 में गड़बडि़यों को लेकर लगे गंभीर आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन की अगुवाई में एक हाई पावर कमेटी गठित की थी।
अक्टूबर 2024 में कमेटी ने NTA को दिए थे सुझाव
अक्टूबर 2024 में कमेटी ने एनटीए व परीक्षा में सुधार के लिए कई अहम सुझाव दिए थे। कमेटी ने कहा था कि प्रश्न पत्रों को डिजिटल माध्यम से परीक्षा के पहले केंद्रों तक पहुंचाया जाए। जिसे परीक्षा से आधे घंटे पहले एक विशेष कोड के जरिए खोला जाए और उसे परीक्षा केंद्र पर ही एक प्रिंटर की मदद से तुरंत छाप कर छात्रों को दिया जाए। इससे पेपर लीक होने और परिवहन के दौरान उससे छेड़छाड़ का कोई खतरा नहीं रहेगा।
साथ ही यह भी सुझाव दिया था यदि यह संभव न हो तो एनटीए अपना खुद का एक प्रिटिंग प्रेस स्थापित करें। जहां वह अपनी देखरेख व कड़ी सुरक्षा में जैसे बजट की छपाई होती है, वैसे ही छापे और उन्हें सुरक्षित तरीके से अपने परिवहन साधनों से उन्हें पहुंचाए। हालांकि हाईपावर कमेटी के सुझाव के बाद भी इन सुझावों पर एनटीए ने कोई अमल नहीं किया।
गौरतलब है कि 2024 में नीट-यूजी में गड़बड़ियों को लेकर जो आरोप लगे थे, उनमें बिहार में परिवहन के दौरान प्रश्न पत्रों के लीक होने का मामला भी सामने आया था।
कमेटी ने यह भी दिए थे अहम सुझाव
दो चरणों में परीक्षा
नीट-यूजी को भी जेईई मेन की तरह दो चरणों में आयोजित किया जाना चाहिए। इससे इस परीक्षा में शामिल होने वाले आवेदकों की परीक्षा को लेकर ठीक ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा।
हाइब्रिड व ऑनलाइन मोड में कराई जाए परीक्षा
परीक्षा को पूरी तरह ऑफलाइन पेन-पेपर मोड से हटाकर जहां संभव हो उसे ऑनलाइन कराया जाए। वहीं जहां संभव नहीं है वह हाइब्रिड मोड में यानी डिजिटल तरीके से प्रश्न पत्रों को भेजकर इसे कराया जाए।
सरकारी विद्यालयों में ही बनाए जाए परीक्षा केंद्र: परीक्षा के लिए निजी केंद्रों की जगह केंद्रीय विद्यालयों के साथ ही जवाहर नवोदय विद्यालयों जैसे सरकारी संस्थानों का चयन किया जाए। परीक्षा केंद्रों के चयन में स्थानीय डीएम व एसपी के भी सुझाव लिए जाए।
एनटीए का पुनर्गठन
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में संविदा या ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की जगह फुल टाइम कर्मचारियों की तैनाती दी जाए। अभी इन परीक्षाओं के आयोजन में हर स्तर पर निजी एजेंसियों शामिल है।