मिडिल ईस्ट में तनाव के चरम पर पहुंचने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर सहमती बन गई।
इस ऐतिहासिक समझौता के पीछे ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की निर्णायक भूमिका रही।
उनके हरी झंडी देने से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का खौफनाक अल्टीमेटम टल गया, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ‘पूरी सभ्यता मिट जाएगी और कभी वापस नहीं आएगी’।
मोजताबा का ग्रीन सिग्नल
रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को जब ट्रंप का अल्टीमेटम लटका हुआ था, तब मोजतबा खामेनेई ने अपने अधिकारीयों को पहली बार समझौते की दिशा में बढ़ने का निर्देश दिया।
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, मोजताबा की हरी झंडी के बिना सौदा संभव नहीं था। सोमवार रात तक मध्यस्थों को अमेरिका की मंजूरी मिल गई थी, जिसमें दो सप्ताह के युद्धविराम का प्रस्ताव शामिल था। मोजतबा खामेनेई पूरे सोमवार और मंगलवार को प्रक्रिया में एक्टिव रूप से शामिल रहे।
ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने मंगलवार सुबह भी अपने उसी दाराने वाले बयान को दोहराया था। उन्होंने कहा, ‘आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी।’ इसमें ईरान के बुनियादी ढांचे, पुलों और पावर प्लांट्स को पूरी तरह नष्ट करने की धमकी दी गई थी।
ईरान ने पहले 45 दिनों के सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और स्थायी समाधान की मांग की थी। लेकिन खामेनेई के निर्देश के बाद बातचीत तेज हो गई। ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव आया, जिसे ट्रंप ने ‘काम करने योग्य आधार’ बताया।