बाब-अल-मंदेब में कार्गो जहाज पर हूती लड़ाकों का हमला, तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक की मौत…

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को लाल सागर में यमन के एक व्यापारिक जहाज पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर दिया।

इसमें चार नाविकों की मौत हो गई। मृतकों में तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल हैं। यह अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद हूती के किसी हमले में नाविकों की मौत की पहली घटना बताई जा रही है।

यमन के तटरक्षक बलों के अनुसार, हमले के बाद जहाज पर सवार चालक दल का नियंत्रण खत्म हो गया। तटरक्षक बलों ने ‘तिहामाह’ नामक जहाज तक पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। यूके मैरिटाइम रिस्क मैनेजमेंट ग्रुप वैनगार्ड के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने बचाव अभियान में जुटे तटरक्षक बलों पर भी दोबारा मिसाइल हमला किया।

यह जहाज यमन के सरकारी नियंत्रण वाले अल मोखा बंदरगाह से शनिवार को रवाना हुआ था और पेरिम द्वीप तक पहुंच चुका था। इसके बाद उस पर हमला हुआ।

होर्मुज में भी जहाज पर हमले की रिपोर्ट

एक अन्य घटना में होर्मुज स्ट्रेट के पास पनामा के झंडे वाले कंटेनर जहाज ‘वेला नोवा’ पर मिसाइल हमले की खबर है। वाल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ओमान के समुद्री क्षेत्र में जहाज पर अमेरिकी सैन्य हेलीकाप्टर से हेलफायर मिसाइल दागी गई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था।

हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से इस कार्रवाई की तत्काल पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस घटना से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। रिपोर्ट सही साबित होने पर यह अप्रैल में घोषित अमेरिकी नाकेबंदी के बाद अमेरिकी सेना द्वारा निशाना बनाया गया 12वां जहाज हो सकता है।

अमेरिकी संगठन ‘यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान’ के वरिष्ठ सलाहकार चार्ली ब्राउन ने कहा कि ‘वेला नोवा’ ने हाल में मुंबई और मलेशिया के पोर्ट क्लैंग में भी लंगर डाला था। उनके अनुसार, इन बंदरगाहों पर ईरान से जुड़े दूसरे जहाजों की मौजूदगी भी देखी गई है। संगठन जहाजों और उपग्रहों की ट्रैकिंग के जरिए ईरान से जुड़ी समुद्री गतिविधियों पर नजर रखता है।

वैनगार्ड के अनुसार, ‘वेला नोवा’ पर हमला पाकिस्तान के तट से करीब 71 नाटिकल मील दूर होने की बात सामने आई है।

ईरान ने बढ़ाया गैस उत्पादन

इस बीच, ईरान युद्ध से पहले के उत्पादन स्तर की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है। ईरान के तेल मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सितंबर तक गैस उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 95 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य है। युद्ध से पहले यह क्षमता करीब 230 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रतिदिन थी।

अमेरिका-ईरान में बयानबाजी तेज

वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एपी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के खिलाफ युद्ध में अपनी ताकत का परिचय कराकर ईरान ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ईरान की पहचान अब एक मजबूत और अजेय शक्ति के रूप में हो रही है।

उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका की मांगों के आगे झुकने से इन्कार कर दिया है और होर्मुज स्ट्रेट भी तभी खुलेगा, जब ईरान की सभी मांगें मानी जाएंगी और नाकेबंदी खत्म होगी। उधर, ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नवनियुक्त प्रमुख मोहसिन रेजाई ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपना रवैया नहीं बदलता और ईरान की मांगें नहीं मानता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद ही रहेगा।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि या तो ईरान आर्थिक रूप से टूट जाएगा या हम उस पर बहुत बुरी तरह हमला करेंगे। उन्होंने कहा कि ईरानी वार्ताकार भटकाव प्रकृति के हैं। वे कभी कुछ कहते हैं और अगले ही पल अपनी बात से पलट जाते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने से रोक रही है। वे हमारे लिए समस्या खड़ी कर सकते हैं, लेकिन वे टूट चुके हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *