सऊदी के दो टैंकरों पर हूती का हमला, ट्रंप बोले- ‘दोबारा हमला हुआ तो गंभीर परिणाम होंगे’…

फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष तेजी से लाल सागर की तरफ बढ़ने लगा है। ईरान समर्थित हूती चरमपंथियों ने गुरुवार को पहली बार लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले किए।

हमले के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ईरान और हूती को चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि अगर हूती ने दोबारा हमला किया तो इसके लिए ईरान को जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि ईरान और हूती, दोनों को बड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

हूती ने लाल सागर में सऊदी के दो टैंकरों पर हमला किया

होर्मुज के साथ-साथ बाब अल मंदेब से भी जहाजों के आवागमन बाधित होने की आशंका में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत छह प्रतिशत तक बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इससे पहले मई में कच्चा तेल इस स्तर पर पहुंचा था। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया।

आशंका है कि तेल की कीमत 120 डॉलर तक जा सकती है। ईरान ने दावा किया कि कुवैत और जार्डन में उसने अमेरिकी सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

अमेरिकी सेंटकाम ने दावा किया कि ईरान के नौ जहाजों को वापस लौटाया गया, जबकि एक को निष्क्रिय कर दिया गया। वहीं, ईरान ने भी दावा किया कि हमले में एक जहाज में आग लगी, जबकि दो अन्य जहाजों को वापस लौटना पड़ा।

एपी के अनुसार, साबा न्यूज एजेंसी ने हूती के हवाले से कहा कि गुरुवार को लाल सागर में सऊदी अरब के दो जहाजों, एनसीलिया और लायला पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए, जिससे दोनों में आग लग गई।

हूती ने यमन के सना हवाई अड्डे पर पिछले हफ्ते सऊदी अरब के कथित हमले के विरोध में सऊदी के जहाजों के लिए लाल सागर में नाकेबंदी लागू कर रखी है।

एनसीलिया में आग से जानमाल का नुकसान नहीं

इसके अलावा, एक वरिष्ठ हूती अधिकारी ने बताया कि हूती के खिलाफ सऊदी अरब ने जो बरसों पुरानी नाकेबंदी लागू कर रखी है, उसे हटाए जाने तक सऊदी जहाजों के लिए नाकेबंदी जारी रहेगी। रायटर के अनुसार, सऊदी अरब के जिजान बंदरगाह के पास बुधवार देर रात एनसीलिया पर मिसाइल से हमला हुआ।

उधर, सऊदी प्रेस एजेंसी ने बताया कि एनसीलिया में आग से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि एजेंसी ने लायला के बारे में जानकारी नहीं दी।

ब्रिटेन के समुद्री व्यापार अभियान केंद्र (यूकेएमटीओ) ने कहा कि लाल सागर में सऊदी अरब के अल शुकैक से 70 नाटिकल मील दूर एक टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ।

हालांकि, शिपिंग डाटा के अनुसार तनाव के बीच सऊदी अरब से चीन के लिए 40 लाख बैरल तेल लेकर निकले दो सुपरटैंकर बाब अल मंदेब स्ट्रेट की ओर बढ़े हैं।

वहीं, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ऐसा लगता है कि ईरान ने हूती को इस मामले में उलझा दिया है। हूती को ईरान से दूर रहने में ही समझदारी थी।

ईरान को लेकर रूबियो ने कहा कि वे रोज समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं, लेकिन जब भी समझौते की बात आती है, तो वे या तो उसे तोड़ देते हैं या उसमें बदलाव चाहने लगते हैं। वे इसी की कीमत चुका रहे हैं, जो दिनों दिन बढ़ती जाएगी।

यूरोपीय संघ ने भी हूती से अपील की है कि लाल सागर में जहाजों पर हमले रोके जाएं। संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने कहा कि इससे लाल सागर क्षेत्र में खतरनाक हालात पैदा हो सकते हैं।

कुवैत से जार्डन तक हमलों के निशान

ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और जार्डन पर ज्यादा निर्ममता दिखाते हुए वहां स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले किए।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आइआरजीसी) ने कुवैत में पैट्रियट डिफेंस सिस्टम और एक एमक्यू-9 ड्रोन डिपो को तबाह करने का दावा किया, जबकि जार्डन में एक बेशकीमती थाड रडार सिस्टम को भी निष्क्रिय करने की बात कही। जार्डन ने बताया कि बीते 24 घंटे में ईरान की चार मिसाइलों और छह ड्रोन हमलों को विफल किया गया।

उधर, सेंटकाम ने दावा किया कि ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 12वीं रात हमले किए गए। ईरान के पश्चिम में स्थित अहवाज, रामसर और एंडीमेश्क में अमेरिकी हमले हुए, जबकि इराक सीमा के पास स्थित शलमचेह शहर पर मिसाइल हमले में दो लोग मारे गए। ईरानी मीडिया ने बताया कि बुशहर परमाणु संयंत्र के पास अमेरिकी हमले हुए हैं।

ट्रंप ने एक दिन पूर्व ईरान को चेतावनी दी थी कि होर्मुज में एक जहाज पर हमले के बदले ईरान का एक पुल उड़ाया जाएगा। इस पर ईरान की ज्वाइंट मिलिट्री कमांड ने अमेरिका को आगाह किया है कि यदि ऐसा हुआ तो खाड़ी के तेल, गैस, बिजली और आर्थिक ढांचे उसके निशाने पर होंगे और तेल की एक भी बूंद का निर्यात नहीं किया जा सकेगा।

दर्जनभर घायल अमेरिकी सैनिकों को जर्मनी भेजा गया

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ईरानी हमलों में घायल हुए करीब दर्जनभर अमेरिकी सैनिकों को इलाज के लिए जार्डन से जर्मनी के अमेरिकी सैन्य अस्पताल भेजा गया है।

वहीं, सीबीएस न्यूज के मुताबिक अमेरिका ने 150 से ज्यादा सैन्य मेडिकल कर्मियों को जर्मनी भेजा है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और करीब 550 सैनिक घायल हो चुके हैं।

अमेरिकी संसद से 1.15 ट्रिलियन का रक्षा बजट पास

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को बहुत मामूली अंतर से 1.15 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा बजट पास कर दिया। इससे राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान नीति पर संसद में बड़ी जीत हासिल हुई है।

अमेरिकी मीडिया पोलिटिको के अनुसार, ये बजट 216 के मुकाबले 222 वोटों से पास कर दिया गया। सालाना नेशनल डिफेंस अथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) इस बिल का सात रिपब्लिकन ने विरोध किया, जबकि छह डेमोक्रेट सदस्यों ने समर्थन किया।

अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की मंजूरी

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान के खिलाफ अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

इसके बाद अमेरिका हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया और ग्लोस्टरशायर के फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल कर सकेगा। हालांकि, इस फैसले का ग्रीन पार्टी और लिबरल डेमोक्रेट्स ने जहां विरोध किया है, वहीं ईरान ने भी ब्रिटेन को धमकी दी।

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