मध्य अफ्रीका में फैले इबोला वायरस संक्रमण को लेकर भारत सरकार सतर्क हो गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ कांगो और युगांडा के कुछ हिस्सों में फैले इबोला प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ घोषित किया है।
यहां अब तक 300 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं और करीब 90 मौतों की सूचना है। इस स्थिति में भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आइडीएसपी), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) और अन्य संबंधित विभागों ने मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। बैठक में एहतियाती सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को और मजबूत करने का फैसला लिया गया।
भारत में जोखिम की अभी कोई बात नहीं
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भारत में फिलहाल इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है और देश के लिए वर्तमान जोखिम बेहद कम है।
हालांकि, अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए देश के प्रवेश बिंदुओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में निगरानी तथा तैयारियों को और सुदृढ़ किया जा रहा है।
सरकार ने स्क्रीनिंग, निगरानी, क्वारंटीन और केस प्रबंधन से जुड़े मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की समीक्षा शुरू कर दी है।
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआइवी) को जांच के लिए नामित किया गया है, जबकि चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रयोगशालाओं को भी इस प्रक्रिया में जोड़ा जा रहा है।
प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की निगरानी के लिए संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इसके साथ ही प्रमुख हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर आइसोलेशन तथा क्वारंटीन सुविधाओं को तैयार रखा गया है।
अफवाहों से बचने की अपील
स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों और मीडिया से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें।
मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह सतर्क है और किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। लोगों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है और देश में जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
क्या है इबोला और इसके लक्षण?
इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो इबोला वायरस के कारण होती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्तियों या जानवरों के रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या ऊतकों के सीधे संपर्क से फैलता है।
इबोला रोग के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं और इनमें बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चकत्ते और किडनी और लिवर के कार्य में गड़बड़ी के लक्षण दिखाई देते हैं।
भारत में 2014 में इबोला का एक मामला आया था सामने
भारत में इबोला का एकमात्र ज्ञात मामला नवंबर 2014 में सामने आया था, जब लाइबेरिया से आए 26 वर्षीय एक व्यक्ति में दिल्ली में वायरस की पुष्टि हुई थी।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने तब मरीज को अलग-थलग कर दिया था और व्यापक संपर्क जांच की थी, जिससे संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सका। उस समय पश्चिम अफ्रीका में इबोला के प्रकोप से 11,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी।
विशेषज्ञों की सलाह
एम्स, दिल्ली के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय राय ने कहा कि फिलहाल भारत में जोखिम कम है। प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इबोला कोविड-19 की तरह हवा के माध्यम से नहीं फैलता, जिससे बड़े पैमाने पर सामुदायिक संक्रमण की संभावना कम हो जाती है।
यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित शारीरिक तरल पदार्थों, दूषित सतहों या असुरक्षित दफन प्रथाओं के सीधे संपर्क से फैलता है। उचित सुरक्षा उपायों का पालन न करने पर स्वास्थ्यकर्मी और पीड़ित के परिवार अधिक जोखिम में होते हैं।
मेदांता हास्पिटल के डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत की तैयारियों में काफी सुधार हुआ है। अस्पतालों को सतर्क रहना चाहिए, खासकर उन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का इलाज करते समय जिनमें बिना किसी स्पष्ट कारण के बुखार या रक्तस्त्राव के लक्षण हों।
डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इबोला के संचरण के लिए निकट शारीरिक संपर्क आवश्यक है। यह सामान्य संपर्क या केवल एक ही सार्वजनिक स्थान पर यात्रा करने से आमतौर पर इबोला नहीं फैलता है।
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की कड़ी जांच, संदिग्ध रोगियों का शीघ्र अलगाव, स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण का उपयोग और हाथों की उचित स्वच्छता जरूरी है।