किले के सुंदरबनी कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में सब्जियों और फलों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही बारिश, आपूर्ति में कमी और परिवहन लागत बढ़ने के कारण स्थानीय बाजार में कई आवश्यक सब्जियों और फलों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, गरीब परिवारों और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों की रसोई पर पड़ रहा है।
स्थानीय बाजार में इस समय भिंडी 70 रुपये प्रति किलोग्राम, करेला 60 रुपये, कद्दू 80 रुपये, मटर 160 रुपये, बंदगोभी 60 रुपये, सेब 100 रुपये प्रति किलोग्राम, केला 100 रुपये प्रति दर्जन तथा आम 180 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि कुछ सप्ताह पहले तक यही सब्जियां और फल काफी कम कीमत पर उपलब्ध थे, लेकिन अब इनके दाम तेजी से बढ़ गए हैं।
रसोई चलाने के लिए सब्जियां कम करनी पड़ रही
गृहिणियों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। परिवारों को अब सीमित बजट में रसोई चलाने के लिए सब्जियों की मात्रा कम करनी पड़ रही है। विशेष रूप से मजदूर वर्ग और कम आय वाले परिवार इस महंगाई से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों के लिए फल खरीदना भी अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
मंडियों तक ताजा माल नहीं पहुंच पा रहा
व्यापारियों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों से सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। जगह-जगह सड़कें क्षतिग्रस्त होने और परिवहन में देरी के कारण मंडियों तक पर्याप्त मात्रा में ताजा माल नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं डीजल और ढुलाई खर्च बढ़ने का असर भी खुदरा कीमतों पर दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बाजार में आवश्यक वस्तुओं की नियमित निगरानी करने, जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती से कार्रवाई करने तथा उचित मूल्य पर आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।
घरेलू बजट पर पड़ सकता असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मानसून के दौरान आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से सब्जियों और फलों के दामों में अस्थायी बढ़ोतरी सामान्य है, लेकिन यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर आम लोगों की क्रय शक्ति और घरेलू बजट पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। बाजार में बढ़ती महंगाई को लेकर उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि सरकार और संबंधित विभागों को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।