राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए शुक्रवार को चुनाव होना है, लेकिन इससे पहले ही तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आ रही है। नॉमिनेटेड सदस्य हरिवंश के पक्ष में पांच प्रस्तावों के नोटिस मिले हैं, जबकि विपक्ष की ओर से किसी भी उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया।
ऐसे में उनका दोबारा इस पद पर चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। यह पद 9 अप्रैल को उनके पिछले कार्यकाल के खत्म होने के बाद खाली हो गया था। अगर हरिवंश इस बार चुने जाते हैं, तो यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल होगा, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।
उपसभापति पद के लिए विपक्ष ने नहीं उतारा उम्मीदवार
वहीं, दूसरी ओर विपक्ष ने इस चुनाव से दूरी बनाने का फैसला किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसके पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए हैं। उनका कहना है कि पिछले सात सालों से लोकसभा में उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई, जो परंपरा के खिलाफ है।
इसके अलावा, हरिवंश के कार्यकाल खत्म होने के ठीक एक दिन बाद उन्हें फिर से राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया और अब उन्हें उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाया गया है; इसे विपक्ष असामान्य मानता है। तीसरा आरोप यह है कि इस पूरे मुद्दे पर विपक्ष से कोई सार्थक चर्चा नहीं की गई।
हालांकि, रमेश ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध व्यक्तिगत नहीं है और उन्होंने हरिवंश के प्रति सम्मान व्यक्त किया। विपक्ष को उम्मीद है कि अगर हरिवंश फिर चुने जाते हैं, तो वह भविष्य में विपक्ष की बातों को ज्यादा गंभीरता से सुनेंगे और सदन को अच्छे से चलाएंगे।