Gujarat High Court का सख्त रुख: बस कर्मी की मौत पर परिजनों को मिलेगा 6.52 लाख रुपये मुआवजा, निगम की याचिका खारिज…

गुजरात हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में राज्य परिवहन निगम की याचिका को खारिज करते हुए मृतक बस कर्मचारी के परिवार को 6.52 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा है।

कोर्ट ने इस मामले में ‘रोजगार के काल्पनिक विस्तार’ के सिद्धांत को लागू किया है।

क्या है पूरा मामला?

  • घटना: यह दुखद हादसा 31 मई 2008 की रात को गुजरात के घोड़ासर बस स्टेशन पर हुआ था।
  • कारण: बस स्टेशन पर विश्राम गृह की व्यवस्था नहीं थी। सुरक्षा के लिए कर्मचारी बस की छत पर सो गया और करवट बदलते समय नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
  • मृतक: मृतक मगनभाई बस कर्मचारी थे और अपने पीछे पत्नी व दो बच्चों को छोड़ गए हैं।

कोर्ट में परिवहन निगम की दलीलें

गुजरात राज्य परिवहन निगम ने मुआवजे का विरोध करते हुए यह दलीलें दी थीं:

  • हादसा रात के समय हुआ, जो सक्रिय ड्यूटी के घंटों से बाहर था
  • बस की सुरक्षा के लिए कर्मचारी को छत के बजाय केबिन के अंदर सोना चाहिए था

हाई कोर्ट का फैसला और टिप्पणी

गुजरात हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में फैसला सुनाते हुए निगम की आपत्तियों को खारिज कर दिया:

  • ड्यूटी का हिस्सा: कोर्ट ने कहा कि ड्राइवर-कंडक्टर को बस की सुरक्षा के लिए नाइट अलाउंस (रात्रि भत्ता) दिया जाता है। इसलिए रात में बस के साथ रुकना उनकी ड्यूटी का ही हिस्सा है।
  • नियमों का अभाव: निगम ऐसा कोई नियम या सबूत पेश नहीं कर सका, जो चालकों को बस की छत पर सोने से रोकता हो या विश्राम गृह न होने की स्थिति में दिशा-निर्देश देता हो।

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