चीन-ईरान की बढ़ती नजदीकियां, कुवैत से जयशंकर की अहम बातचीत… क्या संकेत दे रही हैं ये हलचल?…

 वॉशिंगटन से आई एक हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा गलियारों में हलचल मचा दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब ईरान का केवल एक दूर बैठा मददगार नहीं रह गया है, बल्कि वह तेहरान की सैन्य क्षमताओं को पुनर्जीवित करने में एक ‘सक्रिय सूत्रधार’ की भूमिका निभा रहा है।

वहीं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिति और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा की।

चीन को लेकर अमेरिका में हलचल

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन और ईरान की यह साझेदारी केवल हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की वैश्विक शक्ति को चुनौती देने और उसे क्षेत्रीय संघर्षों में उलझाए रखने की एक सोची-समझी रणनीतिक साजिश है।

रक्षा कवच की आड़ में युद्ध की तैयारी अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के हवाले से यह चौंकाने वाला रहस्योद्घाटन हुआ है कि चीन कुछ हफ्तों में ईरान को अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली) की आपूर्ति करने की तैयारी में है।

तीसरे देशों के जरिए प्रणालियों को भेजा जा सकता है

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रणालियों को तीसरे देशों के माध्यम से भेजा जा सकता है ताकि चीन की सीधी संलिप्तता पर पर्दा डाला जा सके। हालांकि चीन इन्हें ‘रक्षात्मक’ बता सकता है, लेकिन युद्ध के मैदान में ये प्रणालियां अमेरिकी और मित्र देशों के विमानों और निगरानी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं।

ईरान को उबारने में मदद करेगा चीन

यह कदम ईरान को उन नुकसानों से उबारने में मदद करेगा जो उसे हालिया संघर्षों में झेलने पड़े हैं। रणनीतिक बोझ का बंटवारा और बदलती कूटनीति अमेरिकी थिंकटैंक ‘अटलांटिक काउंसिल’ और बीबीसी जैसी संस्थाओं ने भी इस बात की पुष्टि की है कि चीन लंबे समय से ईरान को ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल के पुर्जे और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

यह ‘स्ट्रेटेजिक बर्डन-शेयरिंग’ का एक खतरनाक रूप है, जहां बीजिंग खुद को एक शांतिप्रिय और व्यापारिक शक्ति के रूप में पेश करता है, लेकिन पर्दे के पीछे से वह ईरान जैसे देशों को मजबूत कर रहा है ताकि पश्चिमी ताकतों का ध्यान और संसाधन बंटे रहें।

अमेरिका-इजरायल और खाड़ी देशों के लिए चेतावनी

यह स्थिति वॉशिंगटन से लेकर यरूशलम और खाड़ी देशों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि चीन ईरान के ‘वारटाइम रीबिल्ड’ (युद्धकालीन पुनर्निर्माण) में इसी तरह सक्रिय रहा, तो यह न केवल क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ेगा, बल्कि भविष्य के युद्धों की दिशा और परिणामों को भी पूरी तरह बदल कर रख देगा।

भारत की कुवैत से बातचीत

इधर, जयशंकर ने इंटरनेट मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि बातचीत का मुख्य फोकस पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम और भारतीय समुदाय के कल्याण पर रहा। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि दोनों नेताओं ने क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम और उनसे निपटने के प्रयासों पर विचार-विमर्श किया।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर प्रतिबंध और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात चिंताजनक बने हुए हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है।

विक्रम मिसरी ने फ्रांस के विदेश मंत्री से द्विपक्षीय संबंधों पर की चर्चा

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों और पश्चिम एशिया की स्थिति सहित मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की। उनकी फ्रांस की यात्रा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हो रही है।

रविवार को पेरिस पहुंचे विदेश सचिव ने फ्रांस के विदेश मामलों के मंत्री बैरोट से मुलाकात की। फ्रांस की यात्रा अमेरिका की उनकी यात्रा के बाद हो रही है, जहां उन्होंने विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ट्रंप प्रशासन के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। विदेश सचिव फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएन्स के साथ भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता करेंगे।

दोनों रक्षा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली पहल सहित कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। भारतीय मिशन ने एक्स पोस्ट में कहा, ”यह यात्रा भारत और यूरोप के बीच निरंतर उच्च स्तरीय आदान-प्रदान को दर्शाती है।”

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