नई तकनीक से बनेगा ग्रीन सीमेंट, बसाल्ट के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में 80% तक कमी का दावा…

कार्बन मुक्त और कैल्शियम से भरपूर सिलिकेट चट्टानों, जैसे बसाल्ट, से सीमेंट उत्पादन पारंपरिक चूना पत्थर आधारित प्रक्रिया की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल साबित हो सकता है।

एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से सीमेंट उद्योग से होने वाले कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन में 80 प्रतिशत से अधिक कमी लाई जा सकती है।

अमेरिका के यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया, सांता बारबरा के शोधकर्ताओं के अनुसार, मौजूदा तकनीकों का उपयोग करते हुए बसाल्ट से सीमेंट तैयार किया जा सकता है।

इससे ऊर्जा की खपत भी सैद्धांतिक रूप से 60 प्रतिशत तक कम हो सकती है।वर्तमान प्रक्रिया में चूना पत्थर यानी कैल्शियम कार्बोनेट को 1,500 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर गर्म कर कैल्शियम आक्साइड में बदला जाता है। यही पदार्थ सीमेंट की मजबूती और टिकाऊपन के लिए अहम माना जाता है।

हालांकि, इस प्रक्रिया में प्रति टन पोर्टलैंड सीमेंट उत्पादन पर लगभग 500 किलोग्राम कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन होता है।शोधकर्ताओं के मुताबिक, वैश्विक कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन में सीमेंट उद्योग की हिस्सेदारी करीब आठ प्रतिशत है, जबकि कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में इसका योगदान 4.4 प्रतिशत माना जाता है।

ऐसे में इस क्षेत्र में उत्सर्जन घटाने से नेट-जीरो लक्ष्यों को हासिल करने में बड़ी मदद मिल सकती है। ‘कम्युनिकेशंस सस्टेनेबिलिटी’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बसाल्ट जैसी कार्बन-मुक्त सिलिकेट चट्टानों से साधारण पोर्टलैंड सीमेंट बनाने की व्यावहारिकता का परीक्षण किया।

अध्ययन में क्या मिला?

टीम ने भूवैज्ञानिक मानचित्रों के आधार पर यह भी पाया कि वर्तमान उत्पादन स्तर के हिसाब से बसाल्ट का भंडार कई लाख वर्षों तक सीमेंट उद्योग की जरूरतें पूरी कर सकता है। अध्ययन में पाया गया कि सिलिकेट चट्टानों से सीमेंट उत्पादन के लिए न्यूनतम ऊर्जा आवश्यकता चूना पत्थर की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक कम हो सकती है।

प्राकृतिक गैस को ऊर्जा स्त्रोत के रूप में इस्तेमाल करने पर प्रति टन सीमेंट उत्पादन में कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन 609 किलोग्राम से घटकर 43 से 59 किलोग्राम तक रह गया। यह इस्तेमाल की गई सिलिकेट चट्टान के प्रकार पर निर्भर करता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि मौजूदा जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा मिश्रण के साथ भी इस तकनीक से कार्बन उत्सर्जन में 25 प्रतिशत से अधिक कमी संभव है।टीम के अनुसार, सिलिकेट चट्टानों में कई आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण धातुएं भी मौजूद होती हैं, जिन्हें सीमेंट उत्पादन के दौरान सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा हरित सीमेंट विकल्पों की तुलना में इस तकनीक का लाभ यह है कि इसमें अंतिम उत्पाद मानक पोर्टलैंड सीमेंट ही रहता है। इससे निर्माण उद्योग में नई सामग्री को अपनाने से पहले जरूरी लंबे परीक्षण, सत्यापन और प्रदर्शन की प्रक्रिया से काफी हद तक बचा जा सकेगा।

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