पोक्सो एक्ट पर सरकार का रुख साफ: सहमति की उम्र 18 साल से कम नहीं होगी, बच्चों की सुरक्षा से समझौते का खतरा…

केंद्र सरकार पोक्सो कानून में यौन संबंध बनाने के लिए सहमति के उम्र 18 वर्ष से कम करने की पक्षधर नहीं है। केंद्र सरकार का कहना है कि सहमति की उम्र में किसी भी प्रकार की ढील या अपवादों का समावेश बाल सुरक्षा को कमजोर करेगा, शोषण के जोखिम को बढ़ाएगा और बच्चों विशेषकर किशोरियों की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को कमजोर करेगा।

ये बात केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शुक्रवार को लोकसभा में दिए एक लिखित जवाब में कही।

महिला बाल विकास मंत्री से लोकसभा सदस्य सुब्बारायमण के. और सेल्वाराज वी. ने सवाल किया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा पोक्सो कानून के बार-बार दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए किशोर वय के वास्तविक संबंधों के मामले में रोमियो जूलिएट क्लाज पर विचार करने और पोक्सो कानून के कठोर प्रविधानों से छूट देने के सुझाव का जिक्र करते हुए इस बारे में स्थिति और ब्योरा पूछा था।

इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने लिखित जवाब में कहा है कि पोक्सो अधिनिमयम में सहमति शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है और वैधानिक ढांचे के तहत 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाना अपराध माना जाता है, चाहें सहमति दी गई हो या नहीं।

इसके अलावा पोक्सो नियम 2020 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा अधिनियम के कार्यान्वयन को सु²ढ़ करने और बाल हितैषी प्रक्रियाओं और संस्थागत सुरक्षा उपायों के माध्यम से बच्चों को यौन शोषण, दु‌र्व्यवहार और ¨हसा से बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिसूचित किया गया था।

सरकार ने कहा है कि सहमति की आयु 18 वर्ष बनाए रखने का विधायी निर्णय सोच-समझकर लिया गया नीतिगत निर्णय है।

कानूनी ढांचे में स्थिरता और सामंजस्य बनाए रखने के लिए, विभिन्न कानूनों में वयस्कता की आयु समान रूप से 18 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता 2023, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, हिन्दू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम 2015, और ¨हदू माइनारिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट 1956 शामिल हैं।

उपरोक्त अधिनियमों के पीछे विधायी आशय यह दर्शाता है कि 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति सहमति देने या ऐसे निर्णय लेने में सक्षम नहीं माने जाते, जिनके दीर्घकालिक परिणामों को वे पूरी तरह से समझ नहीं सकते।

केंद्र सरकार ने कहा है कि सहमति की आयु 18 वर्ष निर्धारित करने वाले कानूनों में एकरूपता का उद्देश्य नाबालिगों के साथ छेड़छाड़, जबरदस्ती और शोषण को रोकना है।

यह माना जाता है कि यौन गतिविधियों से संबंधित मामलों में सार्थक और सूचित सहमति देने के लिए बच्चों में कानूनी और मनोवैज्ञानिक क्षमता की कमी होती है।

पोक्सो अधिनियम 2012 और अन्य बाल केंद्रित कानूनों के तहत बच्चे की परिभाषा भी संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन, विशेष रूप से इसके अनुच्छेद एक के तहत भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप

है। सरकार ने कहा है कि सहमति की उम्र में किसी भी प्रकार की ढील या अपवादों का समावेश बाल सुरक्षा को कमजोर करेगा, शोषण के जोखिम को बढ़ाएगा और बच्चों, विशेष रूप से किशोरियों की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को कमजोर करेगा।

मालूम हो कि लंबे समय से किशोर वय में बने रोमांटिक संबंधों को पोक्सो कानून के कड़े प्रविधानों से छूट देने की चर्चा चल रही है। कोर्ट भी कई बार इस पर ¨चता जता चुका है। ऐसे में सरकार की ओर से आया यह जवाब महत्वपूर्ण है।

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