नयी सरकार में भी जदयू अपने कोर एजेंडा पर मुखर है। कोर एजेंडा के साथ जदयू जनादेश की बातें जोड़ रहा। जदयू के कोर ग्रुप से जुड़े नेताओं का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए को जनादेश इस नारे के साथ मिला था कि 2025 से 30 फिर से नीतीश।
जदयू के वरिष्ठ नेता व सम्राट सरकार में उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी का कहना है कि विधानसभा में नयी सरकार के विश्वासमत हासिल करने के दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मसले तो उठा दिया था कि वोट जब नीतीश कुमार के नाम पर मांगे गए तो आखिर उनकी जगह दूसरे को सत्ता की कमान क्यों सौंप दी गई?
इस सवाल का जवाब कई बार जदयू और यहां तक कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा भी दिया गया है, “हम जनादेश से इधर-उधर नहीं जा रहे। नीतीश कुमार के रास्ते (Nitish Kumar Core Agenda) पर ही नयी सरकार आगे बढ़ेगी। नीतीश कुमार ने स्वयं अपनी मर्जी से सत्ता छोड़कर भाजपा को सौंपी है। उनकी नीतियां ही आगे बढ़ेंगी।”
अपने एजेंडे पर टिकी JDU
जदयू के कोर एजेंडा में रहा है- ‘अल्पसंख्यक समाज का विकास’। इस कोर एजेंडा पर जदयू ने एक दिन पहले स्थिति स्पष्ट कर दी है। उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी द्वारा जदयू प्रदेश कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन बुलाकर यह कहा (Vijay Chaudhary Statement) गया, “जिस तरह से नीतीश कु्मार के शासन में अल्पसंख्यक समाज के विकास (JDU on Minority Development) को लेकर जो काम चल रहा था, उन्हें इत्मीनान है, वही काम इस नयी सरकार में भी होगा। अल्पसंख्यक समाज को इस बात को समझना चाहिए।”
जदयू ने इस प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से एक साथ कई तरह के संदेश दे दिए हैं। पहला काम तो अल्पसंख्यक समाज के बीच नीतीश कुमार के भरोसे को जिंदा रखने का था और दूसरा यह कि सरकार का नेतृत्व भले ही भाजपा के पास हो पर अल्पसंख्यकों के मसले पर जदयू की जो नीतियां रही हैं, उससे समझौता की कोई बात ही नहीं है।
नीतीश ने भाजपा से बनाया तालमेल
इसी तरह जब नीतीश कुमार विधि-व्यवस्था से जुड़े मसले पर समीक्षा बैठक करते थे, तो हर बार ट्रिपल सी यानी क्राइम, करप्शन और कम्यूनिलिज्म को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात कही जाती थी।
सम्राट चौधरी ने भी इसी सूत्र (Samrat Chaudhary Government Policy) को आगे किया है। आपदा को लेकर भी वह पूर्व की सरकार की ही बात कर रहे।
जदयू द्वारा बार-बार यह दोहराया जा रहा कि नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन अपनी जिम्मेवारी खुद भाजपा को सौंपी है। इसलिए जदयू का जो कोर एजेंडा है उससे इधर-उधर जाने की बात कहां है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद इस संदर्भ में स्थितियां और भी साफ होगी।