संसद में सरकार का बड़ा खुलासा: PLI योजना के तहत मार्च 2026 तक ₹2.40 लाख करोड़ से अधिक निवेश, तेल कंपनियों ने खरीदा रिकॉर्ड एथनॉल…

सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआइ) के तहत 31 मार्च, 2026 तक 14 प्रमुख सेक्टरों में 2.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हुआ और 14.15 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हुई हैं।

वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि पीएलआइ कार्यक्रम के तहत निर्यात में पिछले तीन सालों में तेजी से वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में चार लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 लाख करोड़ रुपये और फिर वित्त वर्ष 2025-26 में 15.2 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इस योजना के तहत शामिल 14 सेक्टरों में से सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) माड्यूल में सबसे ज्यादा कुल 64,873 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।

इसके बाद फार्मास्यूटिकल्स में 45,158 करोड़ रुपये और ऑटोमोबाइल और आटो कंपोनेंट्स में 44,326 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। स्पेशियलिटी स्टील में 23,896 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफैक्चरिंग में 20,580 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।

तेल कंपनियों ने 2024-25 में 73,996 करोड़ रुपये का एथनॉल खरीदा

सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने एथनाल आपूर्ति वर्ष 2023-24 में एथनाल खरीदने 48,757 करोड़ रुपये, 2024-25 में 73,996 करोड़ रुपये और 2025-26 में जून तक 49,577 करोड़ रुपये खर्च किए।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने यह भी बताया कि एथनाल आपूर्ति वर्ष 2024-25 के दौरान तेल कंपनियों द्वारा एथनाल मिश्रित पेट्रोल की सबसे ज्यादा बिक्री उत्तर प्रदेश (124.98 करोड़ लीटर) में हुई। इसके बाद महाराष्ट्र (110.66 करोड़ लीटर), तमिलनाडु (92.18 करोड़ लीटर), कर्नाटक (79.24 करोड़ लीटर) और गुजरात (56.29 करोड़ लीटर) का नंबर रहा।

दो सालों में एफपीआइ ने शेयर बाजार से निकाले 4.58 लाख करोड़

सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) ने अक्टूबर, 2024 से अप्रैल, 2026 के बीच शेयर बाजार से कुल 4.58 लाख करोड़ रुपये निकाले।

सरकार ने इस निकासी के लिए घरेलू और वैश्विक कारकों को जिम्मेदार ठहराया। इसमें भू-राजनीतिक तनाव, ट्रेड टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, मुद्रा में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। हालांकि, इसी अवधि में डेट सेगमेंट में 72,701 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।

आंकड़ों से पता चलता है कि 2023-24 में भारतीय इक्विटी में शुद्ध एफपीआई निवेश 2,08,212 करोड़ रुपये था, जो बाद के वित्त वर्ष में नकारात्मक हो गया। 2024-25 में 1,27,041 करोड़ रुपये और 2025-26 में 1,80,832 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष में 13 जुलाई तक शेयर बाजारों में 25,807 करोड़ रुपये का शुद्ध एफपीआई निवेश दर्ज किया गया।।

डेट सेगमेंट में 2024-25 में 1,18,087 करोड़ रुपये, 2025-26 में 1,43,162 करोड़ रुपये और 2026-27 में 13 जुलाई तक 56,694 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) जून 2021 में 33.67 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर जून 2026 में 82.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई।

देश में 52,718 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन

सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि देश में 52,718 सार्वजनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन हैं। इसमें कारों के लिए फास्ट ईवी चार्जर वाले 16,561 चार्जिंग स्टेशन शामिल हैं।

लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए, भारी उद्योग राज्यमंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि सरकार ने देशभर में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करके निजी ईवी यूजर्स के बीच ‘रेंज एंग्जायटी’ (गाड़ी की बैटरी खत्म होने का डर) को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भी प्रकाश डाला।

सरकार ने बताया कि 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक 11,500 करोड़ रुपये के बजट समर्थन के साथ लागू फेम इंडिया स्कीम फेज-दो ने लगभग 16.72 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में मदद की है, जिनमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और फोर-व्हीलर शामिल हैं।

इस स्कीम के तहत 30 जून, 2026 तक 5,197 इलेक्ट्रिक बसें चलाने में मदद मिली है और देशभर में ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए 912.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

कपड़ा उद्योग की पीएलआइ के तहत 8,117.64 करोड़ रुपये का निवेश

कपड़ा उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) योजना के तहत स्वीकृत कंपनियों ने 31 मार्च, 2026 तक 8,117.64 करोड़ रुपये का निवेश किया है और 33,427 नए रोजगार का सृजन हुआ। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कपड़ा राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि कपड़ा उद्योग के लिए पीएलआइ योजना के तहत कुल 170 कंपनियों को मंजूरी दी गई है।

मंत्री ने वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात के लचीलेपन का भी प्रकाश डाला। हस्तशिल्प सहित कपड़ा और परिधान का निर्यात साल-दर-साल 1.8 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 3,25,339 करोड़ रुपये हो गया, जो 2024-25 में 3,19,573.2 करोड़ रुपये था।

सरकार ने कहा कि वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव, बदलती इनपुट लागत और व्यापार संबंधी अन्य चुनौतियों के बावजूद वर्ष के दौरान 100 से अधिक गंतव्य बाजारों में निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।

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