केंद्र सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट में बड़ा सुधार करते हुए कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। पहली बार होने वाली तकनीकी या प्रक्रियागत गलतियों पर कारोबारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। जुर्माना नहीं देना होगा या मुकदमा नहीं होगा।
निर्माता, आयातक, पैकर, डीलर, रिपेयरर, व्यापारी, एमएसएमई एवं अन्य पंजीकृत इकाइयों को गलती होने पर नोटिस जारी कर उन्हें पहली बार सुधार का मौका दिया जाएगा। समय पर सुधार नहीं होने या दोबारा उसी तरह की गलती होने पर ही उन्हें कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने यह व्यवस्था जन विश्वास अधिनियम-2026 के तहत लागू की है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ईमानदार कारोबारियों को राहत देना, अनुपालन आसान बनाना और अनावश्यक मुकदमेबाजी कम करना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं के हित से समझौता नहीं किया जाएगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य ईमानदार कारोबारियों को सहयोग देना और यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को सही वजन, सही माप और सही जानकारी वाले उत्पाद ही मिलें। यानी कारोबारियों को राहत और उपभोक्ताओं को सुरक्षा, दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता है।
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई कारोबारी पहली बार किसी प्रक्रियागत या नियम-कायदों का उल्लंघन करता है तो लीगल मेट्रोलॉजी अधिकारी उसे सीधे दंडित नहीं करेगा। पहले उसे नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें बताया जाएगा कि गलती क्या है और उसे कितने समय के भीतर ठीक करना है। यदि कारोबारी तय समय में कमी दूर कर देता है तो उसके खिलाफ कोई जुर्माना या मुकदमा नहीं चलेगा।
सरकार का मानना है कि इससे कारोबारियों पर नियमों का पालन करने का बोझ कम होगा और वे बिना डर के अपनी छोटी-मोटी गलतियों को समय रहते सुधार सकेंगे। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी भी घटेगी और नियमों का स्वैच्छिक पालन बढ़ेगा।
इन मामलों पर लागू होगी नई व्यवस्था
यह व्यवस्था पंजीकरण, रिकॉर्ड और दस्तावेजों के रखरखाव, मॉडल अप्रूवल, बाट और माप के उपकरणों के निर्माण, बिक्री और मरम्मत, आयात, पैकेज्ड वस्तुओं से जुड़े नियमों तथा अनिवार्य जानकारी और रिटर्न जमा करने जैसे मामलों पर लागू होगी। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत पहली बार होने वाले ऐसे नियामकीय उल्लंघन भी इसमें शामिल किए गए हैं।
जान-बूझकर धोखाधड़ी करने पर सख्त कार्रवाई होगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल पहली बार होने वाली तकनीकी या प्रक्रियागत चूक के लिए ही है। यदि कोई कारोबारी जानबूझकर धोखाधड़ी करता है, बार-बार नियम तोड़ता है, वजन या माप में गड़बड़ी करता है या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाता है तो उसके खिलाफ पहले की तरह सख्त कार्रवाई होगी।
बार-बार नियम तोड़ने वालों पर अधिक ध्यान
नई व्यवस्था से एजेंसियां उन मामलों पर अधिक ध्यान दे सकेंगी, जिनमें उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी, गलत वजन-माप, फर्जी जानकारी या बार-बार नियम तोड़ने जैसी गंभीर अनियमितताएं होती हैं। यानी छोटी प्रक्रियागत गलतियों पर सुधार का अवसर मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े गंभीर मामलों में सख्ती जारी रहेगी।