पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, कानून में 7 अहम संशोधन प्रस्तावित; 10 साल तक की सजा का प्रावधान…

देश के युवाओं और विद्यार्थियों का भविष्य और सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने वाले दो साल पुराने कानून में बदलाव कर इस कानून और सख्त करेगी।

सरकार ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में सात अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इन बदलावों में तय समय में जांच, तेजी से सुनवाई, कड़ी सजा और मजबूत सिस्टम बनाने का प्रविधान शामिल है।

सोमवार को लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया जा सकता है। शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी दे दी थी।

इन बदलावों का मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों की जांच और सुनवाई में तेज़ी लाना है, साथ ही जवाबदेही बढ़ाना और पेपर लीक व परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों में रोकथाम को मज़बूत करना है।

एक अहम प्रविधान के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वे इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए किसी भी ‘सेशन कोर्ट’ को ‘स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट’ के तौर पर नामित कर सकें।

प्रस्तावित संशोधनों में यह भी जरूरी किया गया है कि ऐसी अदालतों में कार्यवाही रोजाना हो और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरे हो जाएं।

यह प्रस्ताव है कि केंद्र सरकार को जरूरत पड़ने पर इस कानून के तहत अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) बनाने का अधिकार दिया जाए। जांच तेजी से पूरी हो, इसके लिए विधेयक में यह प्रस्ताव है कि इस कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के अंदर पूरी कर ली जाए।

एक अन्य संशोधन के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को इस कानून के तहत मामले चलाने के लिए एक या ज़्यादा विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित कानून का मकसद इस कानून के तहत किए गए अपराधों के लिए जेल की सज़ा और जुर्माने को बढ़ाना भी है। इसके साथ ही विधेयक में अपील करने की व्यवस्था भी है, जिसके तहत किसी भी फैसले, सज़ा या आदेश के खिलाफ अपील हाई कोर्ट की खंडपीठ के सामने की जा सकेगी।

प्रस्ताव है कि अपील स्वीकार होने के तीन महीने के भीतर उसका निपटारा कर दिया जाए। नीट- यूजी पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा छात्रों से किए गए वादे को निभाते हुए यह कदम उठाया गया है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक में संलिप्त पाए जाने पर पांच से 10 साल तक की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा का प्रविधान है। वहीं, यदि यह अपराध किसी संगठित गिरोह द्वारा किया जाता है, तो न्यूनतम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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