नीट-यूजी की तीन मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों और मानसिक तनाव से जूझ रहे लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है।
स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने संसदीय स्थायी समिति को आश्वासन दिया है कि 21 जून को होने वाली नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष होगी।
संसदीय समिति के सामने रखा पक्ष
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली इस समिति के सामने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के अध्यक्ष अभिजात सी. सेठ ने अपना पक्ष रखा।
वैश्विक स्तर से सीख और समन्वय की जरूरत संसदीय समिति के सदस्यों ने अधिकारियों को अमेरिका और चीन जैसे देशों का उदाहरण दिया, जहां इतनी बड़ी परीक्षाएं बिना किसी शिकायत या पेपर लीक के आयोजित की जाती हैं। समिति ने सुझाव दिया कि भारत को भी इन वैश्विक मानकों और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ को अपनाना चाहिए।
नीट को लेकर ‘फूल-प्रूफ’ बंदोबस्त
इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए एनएमसी और एनटीए के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया गया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आगामी परीक्षा के लिए ‘फूल-प्रूफ’ बंदोबस्त किए जा चुके हैं।
छात्रों का तनाव और आत्महत्याओं पर चिंता बैठक में सांसदों ने पेपर लीक और परीक्षाओं के रद होने से छात्रों में बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।
दोषियों की गिरफ्तारी पर रिपोर्ट सौंपी
समिति ने सरकार से पीड़ित परिवारों की मदद करने और छात्रों का हौसला बढ़ाने की अपील की। दूसरी ओर, सीबीआई के निदेशक प्रवीण सूद ने भी समिति को पेपर लीक मामले की जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की प्रगति रिपोर्ट सौंपी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं और पिछली गलतियों को किसी भी कीमत पर दोहराया नहीं जाएगा।