कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को लोक सभा में परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार को खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करना देश के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
थरूर ने 2016 की नोट बंदी का हवाला देते हुए कहा कि, जिस तरह बिना पर्याप्त तैयारी के नोट बंदी लागू की गई थी, उसी तरह परिसीमन भी ‘राजनीतिक नोट बंदी’ साबित हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा, “आपने नोट बंदी भी अचानक लागू की थी और उसका नतीजा देश ने देखा। अब परिसीमन को भी उसी तरह आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसा न करें।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस तरह के फैसलों से सहकारी संघवाद पर क्या असर पड़ेगा।
महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर जताई नाराजगी
लोकसभा में चर्चा के दौरान थरूर ने महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे को परिसीमन से जोड़ने पर भी कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण को ‘नारी शक्ति’ के नाम पर तोहफा बता रही है, लेकिन उसे कांटेदार तारों में लपेट दिया गया है।
दरअसल, सरकार ने महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जोड़ दिया है।
थरूर का कहना है कि महिला आरक्षण पूरी तरह तैयार मुद्दा है और इसे मौजूदा सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “हम एक नैतिक और जरूरी मुद्दे को एक जटिल और विवादित प्रक्रिया से क्यों जोड़ रहे हैं, इससे महिलाओं की उम्मीदें बंधक बन रही हैं।”
राज्यों के बीच संतुलन बिगड़ने का बताया खतरा
थरूर ने परिसीमन के संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे उन राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है और जिन्होंने नहीं पाई।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के लक्ष्यों को हासिल किया है, जबकि उत्तर भारत के कुछ राज्य ऐसा नहीं कर पाए।
परिसीमन के बाद उन राज्यों को ज्यादा राजनीतिक ताकत मिल सकती है जहां जनसंख्या ज्यादा बढ़ी है। थरूर ने साफ कहा कि परिसीमन एक जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसे बिना व्यापक चर्चा के लागू नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से अपील की कि, पहले महिला आरक्षण बिल को पास किया जाए और परिसीमन के मुद्दे पर फिलहाल रोक लगाई जाए, ताकि देशहित में संतुलित और सोच-समझकर फैसला लिया जा सके।