संसद का मानसून सत्र कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है और ऐसे में परिसीमन विधेयक पर चर्चा जोरों पर है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि विपक्षी दल प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का विरोध करेंगे लेकिन अगर सरकार उनके सुझाए गए संशोधनों को शामिल करती है तो वे साथ बैठकर इस पर विचार करेंगे।
वे शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी के विरोध में शिवसेना (यूबीटी) के राम रक्षा आंदोलन से पहले नागपुर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। खास बात यह है कि एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि अगर परिसीमन बिल सभी राज्यों में सीटों में एक समान 50 प्रतिशत बढ़ोतरी पर आधारित है तो इसके विरोध का कोई खास कारण नहीं होगा।
‘बिल इस सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं’
सुले की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर राउत ने कहा कि अभी इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि यह बिल इस सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं। उन्होंने कहा, “जब बिल आएगा तो हम सब बैठकर फैसला करेंगे और आगे क्या करना है इस पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन आज आप जो खबर फैला रहे हैं कि पार्टी (एनसीपी-एसपी) में फूट पड़ जाएगी और बहुमत दिखाने के लिए विधाय और सांसद को तोड़ लिया जाएगा, ऐसी बातों का कोई आधार नहीं है।”
‘विधेयक पर हो सकता है पुनर्विचार’
राज्यसभा सदस्य ने आगे कहा कि वे परिसीमन विधेयक का विरोध करेंगे लेकिन अगर उनके सुझाव के अनुसार इसमें जरूरी संशोधन किए जाते हैं तो विपक्ष इस पर विचार कर सकता है।
मानसून सत्र में विधेयक पेश करने पर सरकार कर रही विचार?
20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लाने की योजना बना रही है। इस विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है।